टीनएज में कभी-कभी स्मोकिंग करने वालों को भी कैंसर का खतरा- स्टडी

एक नई स्टडी से पता चला है कि ‘सोशल स्मोकिंग’, यानी कभी-कभी स्मोकिंग करने वाले, फेफड़ों को उतना ही नुकसान पहुंचाते हैं जितना कि दिन में कई पैकेट स्मोकिंग करने वाले।

रिसर्च से पता चला है कि थोड़ी-बहुत स्मोकिंग भी लंबे समय में लंग कैंसर का खतरा बढ़ा सकती है। हालाँकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि स्मोकिंग छोड़ने से खतरा कम तो होता है लेकिन यह पूरी तरह खत्म नहीं होता। दरअसल कम उम्र में फेफड़ों के कैंसर पैदा करने वाले तत्वों (Carcinogens) के संपर्क में आने से सेल्स म्यूटेट (Cell mutation) होने लगते हैं।

इस संबंध में यूएस रिसर्चर्स ने जानकारी साझा की है कि मौजूदा लंग कैंसर स्क्रीनिंग गाइडलाइंस लगभग आधे मामलों को छोड़ देती हैं क्योंकि वे ज़्यादातर हेवी स्मोकर्स पर फोकस करती हैं और उन लोगों को नज़रअंदाज़ करती हैं जो वर्षों से कभी-कभी स्मोकिंग करते हैं।

भारत तंबाकू नियंत्रण संबंधी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की पिछली रिपोर्ट से पता चलता है कि, किशोरियों में धूम्रपान दोगुने से भी अधिक हो गया है। रिपोर्ट बताती है कि टीनेज लड़कियों में लड़कों की तुलना में स्मोकिंग बढ़ी है। एक दशक में स्मोकिंग करने वाली टीनेज लड़कियां 3.8% बढ़ी है, जबकि इसी दौरान लड़कों की संख्या 2.3% बढ़ी है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, भारत में लगभग 27 करोड़ लोग ऐसे हैं जो किसी न किसी तंबाकू उत्पाद का सेवन करते हैं। देश में तंबाकू की वजह से हर साल साढ़े 13 लाख मौतें भी होती हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि स्मोकिंग न करने वालों की तुलना में स्मोकिंग करने वालों में प्रीमैच्योर डेथ का खतरा 31% से 55% तक बढ़ जाता है।

धूम्रपान की भले ही शौक के साथ शुरू हुई हो और कितनी ही कम हो मगर इसे शरीर की कोशिकाओं (Cells) के स्तर पर होने वाला नुकसान खतरनाक होता है। तंबाकू में मौजूद 70 से अधिक नुकसान पहुँचाने वाले रसायन सीधे डीएनए को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे कैंसर की शुरुआत होती है।

स्टडी में 50 से 80 साल की उम्र के लगभग दस लाख लोगों के डेटा की पड़ताल की गई। इस से मिलने वाले नतीजे बताते हैं कि जो लोग लंबे समय तक सिगरेट पीते थे, उन्हें खतरा था, वहीँ जो लोग सिर्फ़ ‘पीक इयर्स’ में स्मोकिंग करते थे, उन्हें कम खतरा था।

मौजूदा यूएस गाइडलाइंस के तहत, अगर किसी व्यक्ति ने 15 साल से स्मोकिंग नहीं की है, तो उसे स्क्रीनिंग के लिए एलिजिबल नहीं माना जाता, भले ही उसने पहले कितने भी साल स्मोकिंग की हो।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि स्मोकिंग किसी भी डोज़ में लंग कैंसर का सबसे बड़ा कारण है। यूके में हर साल लगभग 50,200 नए मामले सामने आते हैं और यह दुनिया भर में कैंसर से होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *