दुनिया के हर हिस्से से जलवायु संकट के ख़तरे के संकेत मिल रहे हैं: यूएन

संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ़्रेमवर्क कन्वेंशन के कार्यकारी सचिवसाइमन स्टील ने कहा कि तेज़ी से गर्म होती दुनिया में ये “लगातार बढ़ती आपदाएँ” अब अरबों लोगों के जीवन की हक़ीक़त बन चुकी हैं। जीवाश्म ईंधनों से स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ने की मानवता की गति बहुत धीमी है, और वनों की भी पर्याप्त रक्षा नहीं की जा रही है।

जीवाश्म ईंधनों पर दुनिया की निर्भरता जलवायु संकट को गहरा कर रही है। संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को यह चेतावनी दी। उनका कहना है कि इससे प्राकृतिक आपदाएँ इतनी भयावह होती जा रही हैं कि लगता है मानो यह हक़ीक़त नहीं बल्कि कोई बुरा सपना हो।

यूएन न्यूज़ की एक खबर के मुताबिक़ ,संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ़्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) के कार्यकारी सचिव साइमन स्टील ने एक वक्तव्य में कहा, “दुनिया के हर हिस्से से जलवायु संकट के ख़तरे के संकेत मिल रहे हैं।”

साइमन स्टील ने चेतावनी दी, “इस सप्ताह तापमान फिर बढ़ने की आशंका है। जलवायु संकट से लोगों के जीवन और अर्थव्यवस्थाओं को इतना भारी नुक़सान हो रहा है कि कई देशों में आपात स्थिति जैसे हालात पैदा हो गए हैं।”

यह इसलिए महत्वपूर्ण है
वर्ष 2026 की शुरुआत से योरोप में जंगल की आग की 1,254 घटनाएँ दर्ज की गई हैं और ढाई लाख हैक्टेयर से अधिक भूमि जल चुकी है।
जापान में लगातार गर्मी के रिकॉर्ड टूट रहे हैं। देश में 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक तापमान का अब तक का सबसे लम्बा दौर दर्ज किया गया है।
भीषण तापलहरों से ज़मीन और जंगल बुरी तरह सूख गए हैं, जिससे फ़्रांस, स्पेन और योरोप के अन्य हिस्सों में रिकॉर्ड स्तर पर जंगल की आग भड़क रही है। हज़ारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है और क्षेत्रीय व राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं को भारी नुक़सान हुआ है।
उत्तरी अफ़्रीका में तापमान 49 डिग्री सेल्सियस के क़रीब पहुँच रहा है, जिससे लोगों के जीवन और आजीविकाओं पर गम्भीर ख़तरा पैदा हो गया है। भीषण गर्मी के कारण अस्पतालों और बिजली प्रणालियों पर भी भारी दबाव पड़ रहा है।
चिली में घातक तूफ़ानों से कई लोगों की मौत हुई है और अनेक घर तबाह हो गए हैं।

समस्या का समाधान इस तरह है
साइमन स्टील का कहना है कि इसके कारणों को लेकर विज्ञान बिल्कुल स्पष्ट है. कोयले, तेल और गैस की “भारी मात्रा” जलाए जाने से वैश्विक तापमान बढ़ रहा है. इसके कारण लम्बी तापलहरें, भीषण बाढ़ और विनाशकारी महातूफ़ान अधिक तीव्रता से, बारम्बार आ रहे हैं, और कहीं ज़्यादा नुक़सान पहुँचा रहे हैं।

साइमन स्टील ने कहा, “क्या किया जाना चाहिए, यह भी उतना ही स्पष्ट है – कोयले, तेल और गैस पर निर्भरता तेज़ी से कम करनी होगी, नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार करना होगा और उन लोगों की रक्षा करनी होगी, जो जलवायु संकट की सबसे भीषण मार झेल रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि आपदाओं को रोकने के लिए जलवायु संकट की अग्रिम पंक्ति में मौजूद अनेक संवेदनशील देशों को आवश्यक गति और स्तर पर कार्रवाई करने के लिए सहायता की ज़रूरत है।

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