चाबियां, अपना मोबाइल फोन या हाल की घटनाएं भूल जाना भी ब्रेन फॉग से जुड़ा हो सकता है। क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, आसान फैसले लेने में ज़्यादा समय लगना और एक साथ कई काम संभालने में दिक्कत होना भी इसके लक्षण हैं।
आज की हाईटेक ज़िंदगी जिस्म को भले ही आराम दे रही हो मगर यह दिमाग़ को थका रही है। अधिकतर लोग इस समय दिन भर मेंटल थकान, सुस्ती या ध्यान लगाने में दिक्कत महसूस करते हैं।
अधिकतर लोग इसे अक्सर नॉर्मल थकान समझ लेते हैं लेकिन अगर यह समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो यह ब्रेन फॉग का संकेत हो सकता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, ब्रेन फॉग कोई अलग बीमारी नहीं बल्कि एक लक्षण है। अगर आप कभी-कभार भूलने की समस्या से जूझ रहे हैं तो यह सामान्य है, लेकिन यदि यह रोजमर्रा की गतिविधियों को प्रभावित कर रहा है तो ऐसे में डॉक्टर से परामर्श लेना ज़रूरी है।
इसके कारणों पर ध्यान दें तो यह नींद की कमी, लगातार स्ट्रेस, विटामिन की कमी, हार्मोनल बदलाव, इंफेक्शन या दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं की वजह से हो सकता है। इसमें पर्याप्त सोने के बाद भी मानसिक धुंधलापन रहता है।
नॉर्मल थकान और ब्रेन फॉग में अंतर होता है। क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, नॉर्मल थकान आराम करने और रात में अच्छी नींद लेने के बाद दूर हो जाती है जबकि ब्रेन फॉग में, काफ़ी आराम करने के बाद भी दिमाग पहले की तरह काम नहीं करता।
ब्रेन फोग व्यक्ति को ध्यान लगाने, नई जानकारी याद रखने और मेंटली एक्टिव रहने में दिक्कत होती है। बहुत से लोगों को ऐसा लगता है कि उनका दिमाग धीमी रफ़्तार से काम कर रहा है। लगातार मानसिक धुंधलापन कार्यक्षमता के साथ आत्मविश्वास को भी प्रभावित कर सकता है।
ब्रेन फॉग के लक्षण- हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि किसी काम पर ज़्यादा देर तक फोकस न कर पाना इसका एक बड़ा लक्षण है। एनसीबीआइ के अनुसार, सुबह उठने के बाद भी दिमागी तौर पर थका हुआ महसूस करना भी एक लक्षण हो सकता है।
इस बारे में अमरीकन ब्रेन फाउंडेशन का कहना है कि बार-बार चाबियां, अपना मोबाइल फोन या हाल की घटनाएं भूल जाना भी ब्रेन फॉग से जुड़ा हो सकता है। क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, आसान फैसले लेने में ज़्यादा समय लगना और एक साथ कई काम संभालने में दिक्कत होना भी इसके लक्षण हैं।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि लगातार ब्रेन फॉग रहने से सेल्फ-कॉन्फिडेंस और परफॉर्मेंस दोनों पर असर पड़ता है। इसे स्ट्रेस, एंग्जायटी या डिप्रेशन से भी जोड़ा जा सकता है। अगर ये लक्षण बने रहें, तो डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी है। इसके अलावा, रोज़ाना 7-9 घंटे की अच्छी नींद लेना, बैलेंस्ड डाइट लेना और स्ट्रेस कम करने से हेल्दी ब्रेन बनाए रखने में मदद मिल सकती है।