दुनिया भर में स्तनपान की दर में सुधार हुआ है। आंकड़े बताते हैं कि पहले छह महीनों में केवल माँ का दूध पाने वाले शिशुओं का अनुपात 2012 में लगभग 37 प्रतिशत था जो अब बढ़कर 47 प्रतिशत से अधिक हो गया है। वहीं दो वर्ष की आयु तक स्तनपान की दर भी 38 प्रतिशत से बढ़कर 50 प्रतिशत हो गई है।
यूनिसेफ यानी संयुक्त राष्ट्र बाल कोष और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि माँ और नवजात शिशुओं को स्तनपान के लिए बेहतर सहायता देने में स्वास्थ्य सेवाओं, कार्यस्थलों और समुदायों की अहम भूमिका है।
दोनों संगठनों ने परामर्श सेवाएँ बढ़ाने, मातृत्व संरक्षण मज़बूत करने और माँ के दूध के विकल्पों के प्रचार पर सख़्त नियंत्रण की अपील की है। यह अपील 1 से 7 अगस्त तक मनाए गए विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर की गई। इस वर्ष इसकी थीम है – ‘जीवन की सतत शुरुआत के लिए स्तनपान: कारगर उपायों को मज़बूत बनाएँ।’
रिपोर्ट बताती है कि स्तनपान को बढ़ावा देकर हर वर्ष लगभग चार लाख बच्चों और एक लाख 40 हज़ार माताओं की जान बचाई जा सकती है। इस संबंध में विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनिसेफ लंबे समय से सलाह देते रहे हैं कि जन्म के पहले घंटे में स्तनपान शुरू किया जाए और पहले छह महीनों तक शिशु को केवल माँ का दूध दिया जाए। इसके बाद सुरक्षित व उपयुक्त पूरक आहार के साथ दो वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखा जाना चाहिए।
यूएन समाचार का कहना है कि स्तनपान के बढ़े अनुपात के बावजूद प्रगति की रफ़्तार धीमी है और कई देश अब भी वैश्विक लक्ष्यों से पीछे हैं। इस संबंध में यूनिसेफ और डब्ल्यूएचओ के प्रमुखों का कहना है कि स्तनपान में सहयोग देने वाली सेवाओं की कमी है। उनके मुताबिक़, नीतियों को हर जगह समान रूप से लागू नहीं किया जाता और सेवाओं की गुणवत्ता भी अक्सर अपर्याप्त होती है। इस रिपोर्ट में उन क्षेत्रों में स्थिति विशेष रूप से गम्भीर बताई गई है जहाँ कम आय के साथ अस्थिर और मानवीय संकट का प्रभाव है।
स्तनपान हर बच्चे को जीवन की एक स्वस्थ और मजबूत शुरुआत देता है। माँ का दूध आवश्यक पोषण प्रदान करता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, गंभीर बीमारियों से बचाव में सहायक होता है और संज्ञानात्मक विकास को बढ़ावा देता है। माताओं के लिए, स्तनपान स्तन और अंडाशय के कैंसर और टाइप 2 मधुमेह के जोखिम को कम करके दीर्घकालिक स्वास्थ्य में भी योगदान देता है।