फेस्टिवल सीज़न के साथ कई तरह की स्कीमों और दान आदि का भी मौसम शुरू हो चूका है। इन सबके बीच साइबर क्राइम भी अपनी जगह बनाए हुए है और हर दिन ऐसे मामलों में बढ़ोत्तरी के संकेत मिल रहे हैं। साइबर ठग फर्जी क्यूआर या लिंक के ज़रिए आपकी एक गलती से अकाउंट पर हाथ साफ देते हैं।
मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट इस फ्रॉड से बचने के लिए कुछ सावधानीभरी टिप्स साझा करती है। रिपोर्ट के मुताबिक़, त्योहारों में दान या खरीदारी के लिए यूपीआई का इस्तेमाल आसान जरूर है, लेकिन खतरनाक भी। ऐसे में पेमेंट से पहले क्यूआर कोड और प्राप्तकर्ता का नाम जांचना और किसी के कहने पर यूपीआई पिन शेयर न करना जरूरी है।
रिपोर्ट बताती है कि थोड़ी सी सावधानी आपको ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचा सकती है।त्योहारों के समय पूजा-पंडाल, मेले और बाजारों में दान या चंदा देने के बढ़ते ट्रेंड वाले दौर में लोग कैश की जगह यूपीआई से पेमेंट करना ज्यादा आसान समझते हैं। ऐसे में थोड़ी सी जल्दबाजी आपके बैंक अकाउंट के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है।
कैसे होता है साइबर फ्रॉड
फर्जी क्यूआर कोड: रिपोर्ट बताती है कि त्योहारों के समय मेले, पंडाल या सार्वजनिक जगहों पर दान के लिए क्यूआर कोड लगाए जाते हैं। ठग असली क्यूआर कोड के ऊपर अपना फर्जी क्यूआर कोड चिपका सकते हैं। देखने में यह बिल्कुल सामान्य लग सकता है और लोग बिना चेक किए स्कैन करके पैसे भेज देते हैं।
पैसे वापस मिलने का झांसा: ठग कभी-कभी दान या पेमेंट के बदले कैशबैक या पैसे वापस मिलने की बात कह सकते हैं। इसके बाद वे क्यूआर कोड स्कैन करने और यूपीआई पिन डालने के लिए कहते हैं।
फर्जी लिंक या पेज: कुछ मामलों में क्यूआर कोड स्कैन करने के बाद किसी अनजान वेबसाइट या पेज पर ले जाया जा सकता है। वहां गलत ऐप डाउनलोड करवाने या पेमेंट से जुड़ी डिटेल भरवाने की कोशिश हो सकती है।
सावधानियां
पिन नंबर न डालें: पैसे भेजने या दान करने के लिए यूपीआई पिन डालना जरूरी होता है, लेकिन पैसे लेने के लिए यूपीआई पिन डालने की जरूरत नहीं होती। इसी तरह किसी से पैसे लेने के नाम पर क्यूआर कोड स्कैन करने के लिए कहे, तो सावधान हो जाएं।
क्यूआर कोड चैक करें: किसी भी क्यूआर कोड को स्कैन करने से पहले उसे ध्यान से देखें। खासकर मेले, पूजा पंडाल, दुकान या सार्वजनिक जगह पर लगे क्यूआर कोड पर कोई दूसरा स्टीकर चिपका हुआ तो नहीं है, यह जरूर जाँच लें।
नाम वेरिफिकेशन करें: क्यूआर कोड स्कैन करने के बाद तुरंत पिन डालकर पेमेंट न करें। पेमेंट ऐप में सबसे पहले उस व्यक्ति या ऑर्गेनाइजेशन का नाम देखें, जिसके अकाउंट में पैसा जा रहा है। नाम सही नहीं है या आपके सामने मौजूद दुकान, ऑर्गेनाइजेशन या ऑर्गेनाइजर से मैच नहीं होता, तो ट्रांजैक्शन रोक दें।
जल्दबाजी न करें: त्योहारों की भीड़ में कई बार लोग जल्दी-जल्दी पेमेंट कर देते हैं। इसी का फायदा ठग उठा सकते हैं। व्हाट्सएप, मैसेज या किसी अनजान व्यक्ति के जरिए भेजे गए क्यूआर कोड को बिना चेक करे स्कैन न करें।
शिकायत
ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार होने की दशा में बिना देर किए 1930 पर कॉल करके इसकी जानकारी दें। इसके साथ ही भारत सरकार के साइबर क्राइम पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज की जा सकती है।