दो दिन बाद लगेगा इस साल का आखिर सूर्य ग्रहण

अगस्त की 12 को दुनिया के कुछ हिस्सों में सूर्य ग्रहण लगेगा। पूर्ण सूर्य ग्रहण के रूप में यह उत्तरी रूस सहित ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन और पुर्तगाल के कुछ हिस्सों में नज़र आएगा।

भारत में यह ग्रहण ईस लिए नज़र नहीं आएगा क्यूंकि इसका समय रात 9:04 बजे से शुरू होकर 13 अगस्त की की 1:27 बजे तक रहेगा। यूरोप से अमरीका तक नज़र आने वाले इस ग्रहण का समय 2 मिनट 18 सेकंड बताया जा रहा है इस इस बीच आसमान में अंधेरा छा जाएगा।

नासा की ओर से साझा जानकारी में कहा गया है कि उसकी टीमें साइंटिफिक बैलून और ज्यादा ऊंचाई पर उड़ने वाले जेट का इस्तेमाल करके इस बात का पता लगाएंगी कि कुछ समय के लिए आसमान में अंधेरा होने का धरती के वातावरण पर क्या प्रभाव पड़ता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, नासा से मिली जानकारी में कहा गया है कि पूर्ण ग्रहण का चरण उत्तरी रूस के एक छोटे और दूरदराज़ इलाक़े में दोपहर के समय नज़र आएगा। यह पूर्ण ग्रहण बहुत कम समय का होगा। रिपोर्ट्स में इसकी अवधि ढाई मिनट से भी कम बताई गई है।

अंतर्राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमरीका के उत्तरी इलाक़ों और कनाडा सहित उत्तर-पश्चिमी अफ़्रीका एवं यूरोप के कई क्षेत्रों में आंशिक सूर्य ग्रहण दिखाई देगा। कुछ इलाक़ों में सूर्य का 90 प्रतिशत या उससे अधिक हिस्सा ढक जाएगा।

यूरोप और अफ़्रीका के कुछ इलाक़ों में यह इसलिए ख़ास होगा क्योंकि इस स्थानों पर इसे सूर्यास्त के समय देखा जा सकेगा। यानी जिस समय सूर्य डूब रहा होगा, उस समय इसपर आंशिक ग्रहण देखा जा सकेगा।

दो दिन बात पड़ने वाला यह सूर्य ग्रहण कुछ क्षेत्रों में पूर्ण जबकि धरती के कुछ हिस्सों में आंशिक ग्रहण के रूप में दिखाई देगा। जिन इलाक़ो में इसे नहीं देखा जा सकेगा या जिनके पास उस इलाक़े में होने के बावजूद ग्रहण देखने की उचित व्यवस्था नहीं है, वे इस अद्भुद खगोलीय नज़ारे को तस्वीरों के माध्यम से देख सकते हैं।

सभी जानते हैं कि यह खगोलीय घटना तब होती है जब चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य के बीच से गुजरता है और सूर्य की आंशिक या पूरी रोशनी को पृथ्वी तक आने से रोक देता है। सूर्य ग्रहण भी कई तरह के होते हैं। ग्रहण के प्रकार इस बात पर निर्भर करते हैं कि आप दुनिया में कहां हैं और उस समय चंद्रमा पृथ्वी से कितनी दूरी पर है।

पूर्ण सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी एक सीध में आ जाते हैं और चंद्रमा सूर्य की पूरी गोलाकार सतह को ढक देता है। इस समय सुबह होने से पहले या शाम ढलने के समय जैसा अँधेरा हो जाता है साथ ही तापमान पर भी असर पड़ता है।

अगर ग्रहण के समय सूर्य के चारों ओर एक चमकीला छल्ला नज़र आता है तो यह सूर्य का सबसे बाहरी वायुमंडल होता है। इसे ‘कोरोना’ कहते हैं। वलयाकार सूर्य ग्रहण उस समय होता है जब चंद्रमा सूर्य के सामने तो हो मगर वह पृथ्वी से इतनी दूरी पर आरहे कि सूर्य को पूरी तरह नहीं ढक न सके।

क्यूंकि चंद्रमा पूरी तरह से गोल न होकर अंडाकार है। ऐसे में चंद्रमा जब पृथ्वी से अपनी सबसे अधिक दूरी के पास होते हुए सूर्य के सामने आता है, तो वह हमें तुलनात्कमक रूप से छोटा नज़र आता है।

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