सीएसआईआर की वैज्ञानिक आकांक्षा सिंह को इस साल मिले तीन राष्ट्रीय सम्मान

सीएसआईआर की वैज्ञानिक आकांक्षा सिंह को एग्रीकल्चर एंड प्लांट साइंस के क्षेत्र में शोध के लिए 2026 में तीसरी बार राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। आकांक्षा का अध्ययन पौधों की सेहत और टिकाऊ खेती पर केंद्रित है।


एग्रीकल्चर और प्लांट साइंसेज के क्षेत्र में सीएसआईआर की वैज्ञानिक आकांक्षा सिंह को रिसर्च के लिए 2026 में तीसरा बड़ा राष्ट्रीय सम्मान मिला है। आकांक्षा अपनी रिसर्च में इस बात का खास ख्याल रखती हैं कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना फसलों को बीमारियों को बचाया जा सके।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिनल एंड एरोमैटिक प्लांट्स की वैज्ञानिक डॉक्टर आकांक्षा सिंह ने भारतीय विज्ञान के क्षेत्र में एक विशेष उपलब्धि हासिल की है। आकांक्षा को एग्रीकल्चर और प्लांट साइंसेज में एनएएसआई यंग साइंटिस्ट अवार्ड 2026 के लिए चुना गया है।

बताते चलें कि आकांक्षा सिंह को 2026 में तीन बड़े राष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं। इस साल की शुरुआत में ही उनको इंडियन नेशनल यंग एकेडमी ऑफ साइंसेज (INYAS) की सदस्य्ता मिली। इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी (INSA) के लिए भी यंग एसोसिएट के तौर पर उनका चुनाव हुआ। और अब उनके नाम यह तीसरी उपलब्धि आई है।

वनस्पति विज्ञान में पीएचडी डॉक्टर आकांक्षा सिंह CSIR-CIMAP में साइंटिस्ट-D हैं। वह संस्थान के क्रॉप प्रोटेक्शन और प्रोडक्शन डिवीजन में कार्यरत हैं। आकांक्षा का रिसर्च करियर पौधों की सेहत और सस्टेनेबल एग्रीकल्चर (टिकाऊ खेती) पर केंद्रित है।

इसके अलावा प्लांट-माइक्रोब इंटरैक्शन, फंगल बीमारियों, जैविक फसल सुरक्षा, फंगीसाइड (फफूंदनाशक) के विकास और पर्यावरण के अनुकूल बीमारी प्रबंधन जैसे क्षेत्रों पर भी उनका काम केंद्रित है।

डॉक्टर आकांक्षा की रिसर्च का अहम मक़सद फसलों को बीमारियों से बचाने के सुरक्षित तरीके खोजना है। अपने काम के साथ वह इस बात का खास ख्याल रखती हैं कि उनसे द्वारा खोजे गए विकल्पों में केमिकल पेस्टिसाइड्स यानी रासायनिक कीटनाशक बेहद कम हों। इस तरह आकांक्षा सींग का शोध टिकाऊ खेती को बढ़ावा देता है।

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