खाने में ज़्यादा नमक का इस्तेमाल हार्ट फेलियर के नए मामलों से जुड़ा है- स्टडी

नमक के सेवन में मामूली कमी भी, ज़्यादा जोखिम वाली आबादी में हार्ट फेलियर के बोझ को कम कर सकती है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ज़्यादा नमक (सोडियम) खाने से हाई ब्लड प्रेशर हो सकता है, जबकि एक नई स्टडी से पता चला है कि इससे हार्ट फेलियर का खतरा भी बढ़ सकता है।

वेंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स की एक स्टडी से पता चला है कि ज़्यादा सोडियम खाने से खास तौर पर सेंसिटिव लोगों में सीधे हार्ट फेलियर हो सकता है। शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया कि आहार में नमक में थोड़ी से भी कमी दस वर्षों में हार्ट फेलियर के मामलों में 6.6 प्रतिशत की कमी आ सकती है।

यह स्टडी जर्नल ऑफ़ द अमरीकन कॉलेज ऑफ़ कार्डियोलॉजी एडवांसेज़ में पब्लिश हुई थी, जिसमें यूनाइटेड स्टेट्स के साउथ-ईस्ट इलाकों के 25,300 से ज़्यादा लोगों का रिव्यू किया गया था।

स्टडी के मुताबिक, पार्टिसिपेंट्स एवरेज बताई गई मात्रा से लगभग 2 गुना ज़्यादा नमक खा रहे थे, जिससे नई हार्ट डिज़ीज़ का खतरा 15% बढ़ गया।

एक्सपर्ट्स ने कहा कि रोज़ाना हर एक्स्ट्रा 1,000 मिलीग्राम नमक खाने से हार्ट फेलियर का खतरा 8 परसेंट बढ़ सकता है, भले ही इसमें मोटापा, कोलेस्ट्रॉल या ब्लड प्रेशर जैसे फैक्टर्स को ध्यान में रखा जाए।

अमरीकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, रोज़ाना सोडियम का सेवन 2,300 मिलीग्राम तक ही होना चाहिए, जबकि स्टडी में शामिल लोग औसतन 4,269 मिलीग्राम नमक खा रहे थे।

सोडियम से जुड़ा हार्ट फेलियर का बढ़ा हुआ जोखिम सामाजिक-जनसांख्यिकीय कारकों से स्वतंत्र था, जिसमें फ़ूड क़्वालिटी और कैलोरी का सेवन, साथ ही उच्च रक्तचाप और रक्त में लिपिड के उच्च स्तर जैसी स्वास्थ्य स्थितियां शामिल हैं।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि नमक के इस्तेमाल में थोड़ी सी भी कमी दिल की बीमारी के खतरे को काफी कम कर सकती है, लेकिन कम इनकम वाले ग्रुप्स में हेल्दी खाने की चीज़ों तक कम पहुंच एक बड़ी रुकावट है।

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