प्रधानमंत्री प्रशिक्षण योजना के पात्रता मानदंडों का विस्तार किया गया है। कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (एमसीए) द्वारा किस प्रयास के माध्यम से युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
इस विस्तार के साथ अब स्नातक और स्नातकोत्तर के अंतिम वर्ष के छात्र भी इस योजना के तहत आवेदन कर सकेंगे। यह बदलाव छात्रों को पढ़ाई के दौरान ही शीर्ष कंपनियों में सशुल्क प्रशिक्षण का अवसर देगा।
शिक्षा और उद्योग के बीच की दूरी घटेगी
इस पहल के ज़रिए अकादमिक शिक्षा और उद्योग की जरूरतों के मध्य दूरी को कम करके का प्रयास किया गया है। उम्मीद है कि डिग्री पूरी होते ही छात्र नौकरी के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें।
युवा कर सकेंगे आवेदन
पीएमआईएस पोर्टल के माध्यम से अब 18 से 25 वर्ष की आयु के पात्र छात्र आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, उन्हें योजना के मौजूदा पात्रता मानदंडों को पूरा करना होगा।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लक्ष्यों को बढ़ावा
यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के उस उद्देश्य को आगे बढ़ाती है, जिसमें कौशल विकास, उद्योग से जुड़ाव और शिक्षा से रोजगार में सुगम बदलाव को महत्व दिया गया है।
रोजगार क्षमता और कौशल विकास का लक्ष्य
इस योजना के माध्यम से छात्रों को समस्या-समाधान, संचार, टीमवर्क और अनुकूलन क्षमता जैसे जरूरी कौशल विकसित करने का अवसर मिलेगा। इसे आधुनिक कार्यस्थल के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया जा रहा है।
वित्तीय सहायता
चयनित प्रशिक्षुओं को पीएमआईएस के तहत प्रति माह कम से कम 9,000 रुपए की वित्तीय सहायता दी जाएगी, जिससे प्रशिक्षण के दौरान आर्थिक सहयोग भी मिलेगा।
बड़ी संख्या में कंपनियां दे रहीं अवसर
योजना के पायलट चरण में 300 से भी ज़्यादा कंपनियां भाग ले रही हैं। विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण के अवसर उपलब्ध होने की उम्मीद है। बताते चलें कि इसका तीसरा चरण जारी है।
एनओसी अनिवार्य
छात्रों को आवेदन के दौरान अपने शिक्षण संस्थान से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जमा करना होगा। इसमें यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रशिक्षण से उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो।