नेपाल में भारतीय सामानों पर कस्टम ड्यूटी के बाद दोनों देशों के मध्य एक बेहद पुराने रिश्ते पर कानून हावी होता नज़र आ रहा है। इसको देखते हुए कई जगहों पर प्रदर्शन की भी ख़बरें सामने आ रही हैं। ध्यान रहे भारत-नेपाल सीमा को दुनिया की सबसे खुली अंतरराष्ट्रीय सीमाओं में से एक माना जाता है।
गौरतलब है कि नेपाल सरकार अपने कुल राजस्व का लगभग 40 फीसद कस्टम ड्यूटी से प्राप्त करती है। ये कस्टम ड्यूटी पांच प्रतिशत से लेकर 80 प्रतिशत तक है। कस्टम ड्यूटी को बढाकर सरकार अपनी इनकम बढ़ाने का प्रयास करती है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, नेपाल की नवनिर्वाचित बालेन शाह सरकार ने भारत से आयातित 100 नेपाली रुपये (63 भारतीय रुपये) से ज्यादा कीमत के सामान पर अनिवार्य कस्टम ड्यूटी लगा दी है। सामान के प्रकार के आधार पर यह कस्टम ड्यूटी 5 फीसद से लेकर 80 फीसद तक हो सकती है।
बताते चलें कि भारत और नेपाल पर बड़ी संख्या में लोग आवागमन करते हैं। इस बीच सामान की तलाशी में लोगों को घंटों तक लाइन में लगना पड़ रहा है जिससे लोगों का गुस्सा भड़का हुआ है।
हालांकि ये नियम 2023 का है लेकिन बालें शाह के इस फैसले के बाद उन लोगों के लिए मुश्किल हो गई है जो दवाएं, इलेक्ट्रॉनिक्स या अन्य सामान खरीदने सीमावर्ती इलाकों में आते हैं। यहाँ बॉर्डर पार करते समय सख्त चेकिंग हो रही है। हैरानी की बात ये है कि सीमा पर चिप्स और बिस्किट के पैकेट भी जब्त किए जा रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, नेपाल के लोगों के लिए भारतीय सामान तुलनात्मक रूप से सस्ता होता है। लेकिन अब सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले नेपाली नागरिक इस सुविधा का लाभ नहीं ले सकते और ऐसे में यह लोग बालेन्द्र शाह के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ ज़ोरदार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।