वर्ल्ड डायबिटीज डे- इस तरह अपनी सेहत बहाल रखें

आज वर्ल्ड डायबिटीज डे है। आज के दिन डायबिटीज के बारे में जागरूकता फैलाई जाती साथ ही इससे बचने के बारे में भी लोगों को जानकारी दी जाती है। कोविड के बाद से शुगर की समस्या में वर्ल्ड वाइड इज़ाफ़ा हुआ है। इसके लिए ज़रूरी है कि अपने डाक्टर से समय समय पर परामर्श लें और नियमित जांच कराएं।

वर्ल्ड डायबिटीज डे- इस तरह अपनी सेहत बहाल रखें

हेल्थ एक्सपर्ट्स और रिसर्च के मुताबिक़ माता-पिता में से किसी एक को टाइप टू डायबिटीज होने की दशा में बच्चे में इस बीमारी के होने का जोखिम 4 गुना तक बढ़ जाता है। अगर माता-पिता दोनों को टाइप टू डायबिटीज है तो बच्चे में शुगर की बीमारी होने का खतरा 50 फीसद तक बढ़ जाता है। यानी डायबिटीज़ का एक कारण अनुवांशिक भी है।

डायबिटीज दो प्रकार की होती है जिनमे पहला टाइप वन और दूसरा टाइप टू डायबिटीज है। टाइप वन डायबिटीज ज्यादातर अनुवांशिक कारणों से होती है। परिवार में यानी यदि माता-पिता, दादा-दादी किसी को ये बीमारी रही है तो बच्चे को भी टाइप वन डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है।

डायबिटीज के कुल मामलों में से 90 प्रतिशत केस सारी दुनिया में टाइप टू डायबिटीज के हैं। रिसर्च के अनुसार यदि परिवार में किसी व्यक्ति को टाइप टू डायबिटीज है तो यह बच्चे को भी हो सकती है। इसे भी अनुवांशिक दर्जा दिया जा सकता है।

टाइप टू डायबिटीज का सबसे बड़ा कारण बेतुकी दिनचर्या है। जेनेटिक के अलावा टाइप टू डायबिटीज होने के कई और कारण भी हो सकते हैं-
अनियमित दिनचर्या
बढ़ा हुआ वजन
एक्सरसाइज के प्रति लापरवाही
खून में फैट और कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना
हाई ब्लड प्रेशर
महिलाओं में पीओएस

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टाइप वन डायबिटीज

टाइप वन डायबिटीज को अनुवांशिक होने के कारण पूरी तरीके से नियंत्रित नहीं किया जा सकता है इससे होने वाले नुक्सान को ज़रूर रोका जा सकता है। इसके लिए इन बातों पर ध्यान देना ज़रूरी है।
एक बेहतर दिनचर्या आपके स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी है।
व्यायाम को अपने जीवन का हिस्सा ज़रूर बनाएं।
बच्चे को 6 महीने तक सिर्फ मां का दूध पिलाएं।
बच्चे को सभी टीके लगवाए।
बच्चे को इंफेक्शन से बचाएं।
गर्भावस्था में महिलाओं के खान पान का ख्याल रखें और नियमित जांच कराएं।

टाइप टू डायबिटीज

टाइप टू डायबिटीज के खतरे से बचने के लिए अपनी दिनचर्या को ढर्रे पर लाएं।
एक संतुलित डाइट चार्ट का पालन करें।
नियमित रूप से व्यायाम करें।

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