नॉर्वे चेस खिताब जीतने वाले पहले भारतीय बने ग्रैंडमास्टर बने आर प्रज्ञानंदा

भारत के 20 वर्षीय ग्रैंडमास्टर ने आर प्रज्ञानंदा इतिहास रच दिया है। ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानंदा ने जर्मनी के विंसेंट कीमर को हराकर नॉर्वे चेस का खिताब हासिल कर लिया है. जिसके साथ वो प्रतिष्ठित नॉर्वे चेस खिताब जीतने वाले पहले भारतीय बन गए।

प्रज्ञानंद अब उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हो गए हैं जिन्होंने इतने प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में जीत हासिल की है। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि इससे पहले दिग्गज खिलाड़ी भी यह खिताब नहीं जीत पाए थे।

प्रज्ञानंदा ने मात्र 20 साल की उम्र में शुक्रवार को यह उपलब्धि हासिल की। उन्होंने टूर्नामेंट का समापन पांच जीत, दो हार और दो ड्रॉ के साथ कुल 18 अंकों हासिल करने के साथ किया।

प्रज्ञानंदा ने इस टूर्नामेंट में जीत हासिल करने के साथ जो सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल की कि है वह यह है कि उन्होंने टूर्नामेंट में सात बार के नॉर्वे चेस चैंपियन और वर्ल्ड नंबर वन मैग्नस कार्लसन को क्लासिकल शतरंज में दो बार हराया। बताते चलें कि कार्लसन टूर्नामेंट में 13 पॉइंट के साथ स्टैंडिंग में पांचवें स्थान पर रहे।

याद दिला दें 2013 में टूर्नामेंट शुरू होने के बाद से भारत के दिग्गज शतरंज खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद और मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन डी गुकेश जैसे खिलाड़ियों के लिए भी मुश्किल रही थी।

गौरतलब है कि नॉर्वे चेस एलीट शतरंज के सबसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट्स में से एक है और प्रज्ञानंदा इसमें दूसरी बार भागीदारी कर रहे हैं। शतरंज के मुक़ाबले में प्रतिष्ठित खिताब जीतने वाले प्रज्ञानंदा ने 100,000 अमरीकी डॉलर का कैश प्राइज भी जीता है। भारतीय करेंसी में यह राशि लगभग 95 लाख रुपए होती है।

यह टूर्नामेंट प्रज्ञानंद के लिए सरल नहीं रहा। शुरुआत में उनका प्रदर्शन औसत था मगर दूसरे हाफ में उन्होंने ज़ोरदार वापसी की और लगातार बेहतर खेल दिखाया। खिताबी मुकाबला उस समय निर्णायक बना जब अमरीकी ग्रैंडमास्टर वेसली सो अपनी बढ़त को बनाए नहीं रख सके और ड्रॉ के बाद आर्मागेडन टाई-ब्रेक में फंस गए।

प्रज्ञानंद के लिए इन हालत में जीत की उम्मीद बन गई और उन्होंने मौके का पूरा फायदा उठाते हुए अंतिम राउंड में जीत हासिल कर ली। इस जीत के साथ प्रज्ञानंद ने न केवल भारत बल्कि विश्व शतरंज में भी अपनी मजबूत पहचान दर्ज कराई है।

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