भारत में रात 9 से 10 बजे का समय ड्राइविंग के लिए सबसे खतरनाक बताया गया है। यह जानकारी जुनो जनरल इंश्योरेंस की ‘इंडिया रोड सेफ्टी रिपोर्ट 2026’ से सामने आई है। रिपोर्ट भारतीय सड़कों पर ड्राइविंग से जुड़े कई और हैरान करने वाले तथ्य सामने लाती है।
अगर आपका भी मानना है कि पुरुषों के मुकाबले महिलाएं खराब ड्राइविंग करती हैं तो आपको अपनी सोच बदलनी होगी। जुनो जनरल इंश्योरेंस की नई ‘इंडिया रोड सेफ्टी रिपोर्ट 2026’ ने ड्राइविंग से जुड़े ऐसे कई मिथकों को पूरी तरह से तोड़ दिया है।
रिपोर्ट में न सिर्फ यह बताती है कि महिलाएं बेहतर गाड़ी चलाती हैं, बल्कि यह भी बताती है कि भारत की सड़कों पर एक ऐसा खौफनाक घंटा भी आता है, जब ड्राइविंग करना सबसे ज्यादा खतरनाक होता है।
एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, जुनो स्मार्टड्राइव ऐप के डेटा से पता चलता है कि भारत में रात 8 बजे के बाद लोगों का ड्राइविंग स्कोर तेजी से नीचे गिरता है। विश्लेषण के आधार पर रात 9 बजे से 10 बजे के बीच का समय सड़क पर चलने के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक बताया गया है। यह वही समय है जब सबसे ज्यादा लापरवाही से ड्राइविंग की जाती हैं।
अगर आप बात करें सबसे सुरक्षित समय में ड्राइविंग की तो, दोपहर 1 बजे से 2 बजे का समय सबसे अच्छा माना गया है। दरअसल इस समय ड्राइविंग स्कोर सबसे बेहतर पाया गया है।
सुरक्षित ड्राइविंग के मामले में जहाँ महिलाओं का औसत ड्राइविंग स्कोर 92.86 रहा है, वहीँ पुरुषों का स्कोर 92.43 दर्ज किया गया। वैसे तो दोनों के बीच अंतर बहुत कम है, लेकिन इससे यह ज़रूर स्पष्ट होता है कि ड्राइविंग के मामले में महिलाएं न सिर्फ पुरुषों की बराबरी करती हैं बल्कि उनसे बेहतर ढंग से गाड़ी पर काबू रखना जानती हैं।
ड्राइविंग के मामले में हमेशा से ही महिला ड्राइवर्स को मजाक का निशाना बनाया गया है, लेकिन 4.5 मिलियन से ज्यादा ट्रिप्स का डेटा इस स्टीरियोटाइप को पूरी तरह खत्म करता है।
रिपोर्ट से यह भी सामने आया
देश में हर वर्ष करीब 1.73 लाख लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवाते हैं, यह आंकड़ा पूरी दुनिया में होने वाली मौतों का 11 प्रतिशत है।
रिपोर्ट के मुताबिक़, सड़क पर चलने वाले 44 प्रतिशत दोपहिया वाहन चालक और पैदल चलने वाले 19 प्रतिशत लोग इन हादसों का सबसे पहला और बड़ा शिकार बनते हैं।
रिपोर्ट में भारतीय ड्राइवरों की सबसे बड़ी कमजोरी तेज़ी से अचानक ब्रेक लगाना और अचानक ही रफ़्तार बढ़ाना बताई गई है।
रिपोर्ट से पता चलता है कि भारी बारिश या सर्दियों का घना कोहरा ड्राइविंग स्कोर को प्रभावित नहीं करता है। पूरे साल मौसम बदलने के बावजूद भी ड्राइविंग स्कोर एक जैसा मिला।