कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन और क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर भले ही कांग्रेस की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं मगर इस बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर सामने आए हैं। शशि थरूर ने प्रदर्शन पर सहानुभूति व्यक्त करते हुए प्रदर्शनकारी छात्रों, वांगचुक और युवा भारतीयों को एक भावुक खुला पत्र लिखा है।
बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट किए गए पत्र में, थरूर ने वांगचुक से सीधे अपनी भूख हड़ताल खत्म करने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे की ओर देश का ध्यान खींचकर उपवास का मकसद पहले ही पूरा हो चुका है।
गौरतलब है कि सीजेपी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है।इस मांग के सपोर्ट में सोनम वांगचुक 28 जून से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।
पत्र में थरूर ने लिखा, “श्री सोनम वांगचुक-जी से मेरी दिली अपील है: कृपया अपना उपवास खत्म करें। आपने देश की अंतरात्मा को जगाया है। उपवास का मकसद यही होता है। आगे के लंबे सफर के लिए भारत को आपकी आवाज़ की ज़रूरत है।”
सोमवार से शुरू हो रहे संसद के मॉनसून सत्र के मद्देनजर, थरूर ने कहा कि विपक्ष संसद में प्रदर्शनकारी छात्रों की चिंताओं को उठाएगा। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे का समाधान अब आमरण अनशन के बजाय लोकतांत्रिक संस्थाओं के माध्यम से किया जाना चाहिए।
कांग्रेस सांसद ने केंद्र सरकार से प्रदर्शनकारियों के साथ रचनात्मक बातचीत करने का भी आग्रह किया। उन्होंने लिखा, “मैं सरकार से सम्मानपूर्वक आग्रह करता हूं कि वह आगे आए और उस बातचीत में शामिल हो जिसकी हकदार हमारे लोकतंत्र के युवा नागरिक हैं। यह कमजोरी नहीं, बल्कि राजनेता-सुलभ समझदारी है।” उनके ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब सीजेपी ने वांगचुक के नेतृत्व में संसद तक शांतिपूर्ण मार्च निकालने की घोषणा की है, जबकि जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन जारी है।
छात्रों के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए थरूर ने कहा कि उनका गुस्सा उस पीढ़ी की निराशा को दर्शाता है जिसका परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता से भरोसा उठ गया है। उन्होंने लिखा, “जंतर-मंतर पर जमा हुए युवाओं और पूरे भारत में शांति से अपनी आवाज़ उठाने वालों की बात पूरा देश सुन रहा है। आपका गुस्सा अनुशासनहीनता नहीं है। यह उस पीढ़ी का दर्द है जिसने सब कुछ सही किया, फिर भी उसे धोखा मिला। आप अकेले नहीं हैं।”
अपने मध्यम-वर्गीय पालन-पोषण को याद करते हुए, थरूर ने कहा कि वह समझते हैं कि युवा भारतीयों के लिए एक पारदर्शी और योग्यता-आधारित व्यवस्था क्यों इतनी महत्वपूर्ण है। उनका जन्म एक मध्यम-वर्गीय परिवार में हुआ था। उन्होंने लिखा कि थरूर के पिता एक अख़बार में नौकरी करते थे और उनकी माँ गृहिणी थीं। एक ही कमाई से तीन बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाना पड़ता था।
उन्होंने आगे लिखा, “हमारे जैसे परिवार के लिए स्कॉलरशिप, निष्पक्ष परीक्षाएँ, ईमानदार नतीजे यही एकमात्र तरीका था जिससे एक वेतन से तीन बच्चों के सपने पूरे हो सकते थे।”
उन्होंने कहा, “मैं जानता हूँ कि कम और मध्यम आय वाले परिवारों के युवाओं के लिए निष्पक्ष और योग्यता-आधारित व्यवस्था ही आगे बढ़ने की एकमात्र सीढ़ी है। जब वह सीढ़ी टूट जाती है, पेपर लीक हो जाते हैं, परीक्षाएँ रद्द हो जाती हैं और भरोसा खत्म हो जाता है, तो अमीर और ताकतवर लोगों के बच्चों को कोई नुकसान नहीं होता। उनके पास आगे बढ़ने के लिए दूसरी सीढ़ियाँ होती हैं। धोखा आपके सपनों और आपके परिवारों के त्याग (और दुखद रूप से, कुछ घरों में, खुद युवाओं की जान) के साथ होता है।”
उम्मीद भरी बात के साथ अपना पत्र खत्म करते हुए, थरूर ने कहा कि युवा भारतीयों को भविष्य से भरोसा नहीं खोना चाहिए। उन्होंने कहा, “उम्मीद न छोड़ें। यह सीढ़ी फिर से बनाई जाएगी। आपके द्वारा और हर उस भारतीय द्वारा जो आपके साथ खड़ा है।”