उत्तर प्रदेश के प्राइवेट बिल्डर्स को अब बनाने होंगे सस्ते घर

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने आम नागरिकों के लिए घर खरीदने को सरल बनाने के लिए नई अफोर्डेबल हाउसिंग पॉलिसी को मंज़ूरी दी है। इसके लिए प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के तहत मंजूरी दी गई है।

इस नीति के लागु होने से अब निजी डेवलपर्स और बिल्डरों को अपनी हाउसिंग परियोजनाओं में अनिवार्य रूप से 25 प्रतिशत किफायती आवास (Affordable Housing/EWS) बनाना होगा।

उत्तर प्रदेश में कम बजट वाले परिवारों के लिए घर खरीदने का रास्ता आसान होने वाला है। सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना-अर्बन 2.0 के तहत एक नई और सख़्त पॉलिसी जारी की है। इस पॉलिसी के तहत, प्राइवेट डेवलपर्स और बिल्डर्स को अब हर प्रोजेक्ट में कम से कम 25 प्रतिशत अफ़ोर्डेबल हाउसिंग (EWS) बनाना ज़रूरी है।

जैसा कि आम बात है कि बिल्डर्स लग्ज़री प्रोजेक्ट्स लेने में गरीबों के लिए घर को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। इसे रोकने के लिए सरकार ने सख़्त शर्तें लगाई हैं। बिल्डर्स को अपने प्रोजेक्ट की 15 प्रतिशत ज़मीन लोकल अथॉरिटी (जैसे KDA या हाउसिंग डेवलपमेंट अथॉरिटी) के पास गिरवी रखनी होगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, अगर बिल्डर ईडब्ल्यूएस हाउसिंग बनाने में नाकाम रहता है, तो सरकार इस गिरवी रखी ज़मीन को ज़ब्त कर लेगी। जैसे ही घर बनकर तैयार हो जाएँगे और बेनिफिशियरीज़ में बाँट दिए जाएँगे, यह ज़मीन बिल्डर को वापस कर दी जाएगी।

नई पॉलिसी की खास बातें
सरकार ने साफ़ किया है कि प्राइवेट डेवलपर्स को या तो कुल प्रोजेक्ट का 25 प्रतिशत बनाना होगा या ईडब्ल्यूएस कैटेगरी के लिए कम से कम 100 घर बनाने होंगे।

घर का साइज़: ये घर 30 से 35 स्क्वेयर मीटर (कारपेट एरिया) के होंगे।
सब्सिडी: हर घर पर 2.50 लाख रुपये की सब्सिडी मिलेगी (1.50 लाख केंद्र सरकार से और 1.00 लाख राज्य सरकार से)।
बिक्री पर रोक: एक बार घर मिल जाने के बाद, उसे अगले पांच साल तक बेचा नहीं जा सकता।
आधुनिक सुविधाएं: इन सस्ते घरों में सोलर एनर्जी, रेनवाटर हार्वेस्टिंग और ग्रीन बिल्डिंग जैसी सुविधाएं भी होंगी।
सरकार पूरी सख्ती के साथ बिल्डरों को बढ़ावा भी दे रही है। इसके तहत प्रोजेक्ट्स के लिए, बिल्डरों को मैप फीस और लैंड यूज़ चेंज जैसी सरकारी फीस में बड़ी छूट दी जाएगी। भ्रष्टाचार और देरी को रोकने के लिए पूरे प्रोसेस की डिजिटल मॉनिटरिंग की जाएगी।
हर प्रोजेक्ट के लिए रेरा (RERA) के तहत रजिस्ट्रेशन ज़रूरी होगा।
कंस्ट्रक्शन के पांचों फेज़ की जियो-टैगिंग ‘भारत ऐप’ के ज़रिए की जाएगी।
डेडलाइन: चार मंज़िला इमारतों के लिए 24 महीने और उससे ज़्यादा मंज़िला इमारतों के लिए 36 महीने।

कानपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी (KDA) के चीफ़ टाउन प्लानर मनोज कुमार ने कन्फ़र्म किया कि अब जो भी नया मैप अप्रूवल के लिए आएगा, उसे इन नई शर्तों को मानना ​​होगा।

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