अपनी आवाज से सात दशकों तक करोड़ों दिलों की धड़कन बन चुकी यानी आशा भोसले का अंतिम संस्कार सोमवार को मुंबई के शिवाजी पार्क में किया जाएगा। सुरों की इस मलिका का 12 अप्रैल यानी रविवार को निधन हो गया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़, परिवार का कहना है कि आम लोगों को भी उनके घर पर आखिरी श्रद्धांजलि देने का मौका दिया जाएगा।
मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। ख़बरों के मुताबिक़, उनके शरीर के अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। उनका पार्थिव शरीर आज सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक उनके निवास पर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा।
मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि आशा भोसले का अंतिम संस्कार शाम 4 बजे शिवाजी पार्क में किया जाएगा। बताते चलें कि दो दिन पहले उन्हें कार्डियक अरेस्ट आन के बाद अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। हालांकि, उनकी पोती जनाई भोसले ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर हेल्थ अपडेट देते हुए जानकारी दी थी कि उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। उनके लंग में इन्फेक्शन हुआ था।
भारतीय संगीत के इतिहास में आशा भोसले का नाम सबसे यादगार और असरदार आवाज़ों में से एक बन चुका है। भारत के शहर सिंगला में 8 सितंबर, 1933 को जन्मी आशा भोसले बचपन से ही म्यूज़िकल माहौल में पली-बढ़ीं। उन्होंने कम उम्र में ही फ़िल्मी गाने गाना शुरू कर दिया था और जल्द ही अपनी अलग पहचान बना ली थी।
आशा भोसले ने 1943 में सिर्फ़ दस साल की उम्र में अपना आर्टिस्टिक सफर शुरू किया। उस समय उन्हें उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर ने क्लासिकल म्यूज़िक की ट्रेनिंग दी थी। उन्हें 1950 के दशक में शोहरत मिली और इस तरह वह दुनिया की सबसे मशहूर प्लेबैक सिंगर्स में से एक बन गईं। उनकी आवाज़ चंचल, इमोशनल और बहुत वर्सेटाइल थी।
अपने यादगार और लंबे करियर में उन्होंने 20 से ज़्यादा भाषाओं में दस हज़ार से ज़्यादा गाने रिकॉर्ड किए, जिनमें फ़िल्मी गाने, ग़ज़ल, कव्वाली और क्लासिकल म्यूज़िक शामिल हैं, और एक हज़ार से ज़्यादा बॉलीवुड फ़िल्मों में अपनी आवाज़ दी।
आशा भोसले एक ऐसी पर्सनैलिटी थीं जिन्होंने न सिर्फ म्यूज़िक में इतिहास रचा, बल्कि बिज़नेस और फाइनेंशियल सफलता की एक ऐसी मिसाल भी कायम की, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल बनी रहेगी। उन्हें इंडियन म्यूज़िक के इतिहास में सबसे पॉपुलर और असरदार आवाज़ों में से एक माना जाता है।
उन्हें 7 फ़िल्मफ़ेयर अवॉर्ड सहित कई नेशनल अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया है। साल 2011 में, गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने उन्हें दुनिया की सबसे ज़्यादा रिकॉर्ड की गई महिला सिंगर घोषित किया, जबकि सिंगर को 2000 में दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड और 2008 में भारत के दूसरे सबसे बड़े सिविलियन अवॉर्ड पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया।
आशा भोसले अपने पीछे कितनी संपत्ति छोड़ गई हैं
इस दुनिया से अलविदा कह गईं आशा भोसले न सिर्फ अपनी अमर आवाज़ छोड़ गई हैं, बल्कि एक बहुत बड़ी फाइनेंशियल और बिज़नेस विरासत भी छोड़ गई हैं। मशहूर बॉलीवुड सिंगर आशा भोसले अपने पीछे 250 करोड़ रुपये की फाइनेंशियल संपत्ति, 100 करोड़ रुपये की कीमती प्रॉपर्टी और एक रेस्टोरेंट चेन छोड़ गई हैं।
म्यूज़िक के अलावा, आशा भोसले ने बिज़नेस के फील्ड में भी सफलता हासिल की। उन्होंने एक इंटरनेशनल रेस्टोरेंट चेन शुरू की, जो 2002 में दुबई में शुरू हुई और बाद में यूनाइटेड अरब अमीरात, कुवैत, बहरीन और यूनाइटेड किंगडम तक फैली, जहाँ बर्मिंघम और मैनचेस्टर जैसे शहरों में इसकी ब्रांच हैं।
सिंगर आशा भोसले ने हज़ारों गाने गाए और अलग-अलग भाषाओं में परफॉर्म किया, जिससे उन्हें एक रेगुलर इनकम होती थी। शुरुआती सालों में रॉयल्टी न मिलने के बावजूद, उनके बहुत सारे काम ने उन्हें फाइनेंशियली मज़बूत बनाया। वह अपनी ज़िंदगी के आखिरी सालों तक दुनिया भर में लाइव परफॉर्म करती रहीं, जिससे उनकी पॉपुलैरिटी और इनकम दोनों बनी रही।
अपने लंबे करियर के दौरान, सिंगर ने हज़ारों गाने रिकॉर्ड किए और हिंदी समेत कई भाषाओं में अपनी आवाज़ का जादू जगाया। उन्होंने क्लासिकल, ग़ज़ल, पॉप और कैबरे समेत कई जॉनर में गाने गाए और फ़िल्म इंडस्ट्री को अनगिनत यादगार गाने दिए।