एनसीआरबी यानी राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट यूपी में बच्चों के खिलाफ होने वाले यौन अपराधों को लेकर हैरान करने वाले आंकड़े प्रस्तुत करती है। रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के बच्चों को अपने करीबियों, परिचितों या रिश्तेदारों से अधिक खतरा है। प्रदेश में पॉक्सो एक्ट के 97.5 प्रतिशत मामलों में आरोपी पीड़ित बच्चों के करीबी पाए गए हैं।
एनसीआरबी की रिपोर्ट से यह भी पता चला है कि 1657 मामलों में आरोपी दोस्त, सोशल मीडिया के माध्यम से बने मित्र, लिव-इन पार्टनर या शादी का झांसा देकर संपर्क में आने वाले लोग थे। रिपोर्ट के मुताबिक पॉक्सो एक्ट की धारा 4 और 6 के तहत वर्ष 2024 में 3672 पीड़ित बच्चों के मामले दर्ज किए गए। इनमें 3571 लड़कियां और 101 लड़के शामिल हैं।
रिपोर्ट बताती है कि साल 2024 में प्रदेश में पॉक्सो के 3671 मामले दर्ज हुए। इन मामलों में 3581 मामलों में आरोपी पहले से पीड़ितों के जानने वाले थे। केवल 90 मामलों में आरोपी अज्ञात पाए गए। रिपोर्ट से यह भी पता चला है कि 329 आरोपी परिवार के सदस्य थे, वहीँ 1595 रिश्तेदार, पड़ोसी या अन्य परिचित लोग इस अपराध में शरीक थे।
गौरतलब है कि एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार साल 2024 में देशभर में कुल 35,44,608 आपराधिक मामले दर्ज किए गए। राष्ट्रीय अपराध दर 252.3 रही, जबकि उत्तर प्रदेश का क्राइम रेट 180.2 दर्ज किया गया। उत्तर प्रदेश देश में कुल अपराधों के मामले में 18वें स्थान पर है, जबकि देश की करीब 17 प्रतिशत आबादी यूपी में रहती है।
अन्य की बात करें तो एनसीआरबी की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ अपराध में काफी बढ़ोतरी हुई। दर्ज मामलों की संख्या पिछले साल के मुकाबले लगभग 17 प्रतिशत बढ़ गई।
इसी दौरान अनुसूचित जनजातियों के खिलाफ अपराधों की संख्या 23 प्रतिशत कम हुई। देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आदिवासियों को प्रभावित करने वाले अपराधों के 9,966 मामले दर्ज किए गए, जबकि 2023 में यह संख्या 12,960 थी।
एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल दर्ज आपराधिक मामलों की संख्या लगभग 6 प्रतिशत घटी। साल 2024 में 58.85 लाख मामले दर्ज हुए, जबकि 2023 में यह संख्या 62.41 लाख थी।