विश्व पर्यावरण दिवस : यह प्रकृति पर मनुष्य के आक्रमण का काल है

आज पृथ्वी का औसत तापमान निरंतर बढ़ रहा है। ग्लेशियर पिघल रहे हैं, समुद्र में जलस्तर बढ़ रहा है, चक्रवातों और बाढ़ की तीव्रता भी बढ़ी है और शुष्क मौसम के साथ गर्मी की लहरें सामान्य बन चुकी हैं। इन सबके बीच आज जलवायु परिवर्तन मानवता के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।

वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा बढ़ने के पीछे जीवाश्म ईंधनों के अत्यधिक उपयोग, औद्योगिक उत्सर्जन और वनों की अंधाधुंध कटाई जैसे कारण है। मानव की अनियंत्रित महत्वाकांक्षाओं का मूल्य प्रकृति को चुकाना पड़ रहा है। कह सकते हैं कि यह प्रकृति पर मनुष्य के आक्रमण का काल है।

विश्व पर्यावरण दिवस 2026 की थीम ‘प्रकृति से प्रेरित। जलवायु के लिए। हमारे भविष्य के लिए।’ (Inspired by Nature. For Climate. For Our Future.) और “#NowForClimate” (जलवायु के लिए अभी कार्रवाई) पर केंद्रित है। यह विषय जलवायु परिवर्तन से निपटने और प्रकृति-आधारित समाधानों को अपनाने की तत्काल आवश्यकता पर जोर देता है।

विश्व पर्यावरण दिवस का महत्व उस समय जाना गया जब बीसवीं शताब्दी के औद्योगिकीकरण और तीव्र आर्थिक विकास के दुष्प्रभाव सामने आने लगे। ऐसे में साल 1972 में स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में मानव पर्यावरण पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (United Nations Conference on the Human Environment) का आयोजन किया गया।

मानव और पर्यावरण के संबंधों पर आयोजित यह पहला वैश्विक सम्मेलन था। इसी सम्मेलन के दौरान पर्यावरण संरक्षण को अंतरराष्ट्रीय एजेंडा का महत्वपूर्ण विषय बनाया गया। इसके बाद 5 जून को यूनाइटेड नेशंस ने विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया और वर्ष 1973 से इसका आयोजन प्रारंभ हुआ। तब से इसे दुनियाभर के 150 से अधिक देशों में पर्यावरणीय चेतना के सबसे बड़े जन-अभियान के रूप में मनाया जा रहा है।

संयुक्त राष्ट्र की पर्यावरण संस्थाओं की मानें तो मानवीय हस्तक्षेप की वजह से प्रतिवर्ष हजारों प्रजातियां हमेशा के लिए विलुप्त हो रही हैं। वहीँ वनों का कटाई से केवल पेड़ों का घटना ही नहीं, बल्कि अनगिनत सूक्ष्मजीवों, वनस्पतियों और वन्यजीवों के समूचे संसार का खत्म हो रहा है।

ऐसे में पर्यावरण के अनुकूल जीवन शैली (LiFE – Lifestyle for Environment): को अपना कर ही इस धरती को बचाया जा सकता है। ऐसे में ज़रूरी है कि जीवाश्म ईंधन यानी कोयला, तेल आदि पर निर्भरता को समाप्त कर सौर, पवन और हरित हाइड्रोजन जैसी अक्षय ऊर्जा को अपनाया जाए। उपभोग में पुनर्चक्रण और पुनरुपयोग’ शामिल किया जाए।

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