ड्राई आई की दिक्कत हो तो इसे नज़रअंदाज़ न करें

आँखों का सूखना, जलन या आँखों में रेत जैसा महसूस होना होना, चंद ऐसी परेशानियां हैं जो पढ़ने, गाड़ी चलाने, कंप्यूटर पर काम करने या फिर नींद पर असर डालते हैं। दरअसल इनके पीछे का एक कारण ड्राई आई भी हो सकता है।

ड्राई आई के लक्षण एलर्जी, इन्फेक्शन, पलकों की सूजन और कॉर्निया की बीमारी जैसे ही हो सकते हैं, इसलिए लगातार बने रहने वाले लक्षणों की जाँच किसी नेत्र रोग विशेषज्ञ (ऑप्थल्मोलॉजिस्ट) से करवानी चाहिए, न कि खुद से कोई भी प्रोडक्ट आज़माना चाहिए।

ड्राई आई का इलाज इन सभी परेशानी से छुटकारा दिलाता है। साथ ही यह इलाज आँसू की परत यानी टियर फिल्म को स्थिर रखते हुए आँख की सतह को सुरक्षा देता है। कुछ लोगों को सिर्फ़ लुब्रिकेटिंग ड्रॉप्स और रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कुछ आसान बदलाव करने से फ़ायदा होता है, जबकि दूसरों को बेहतर राहत के लिए डॉक्टर की सलाह वाली दवाइयों, पलकों की देखभाल या क्लिनिक में होने वाले इलाज की ज़रूरत पड़ सकती है।

मगर सबसे पहले ज़रूरी है कि किसी भी समस्या के होने पर नेत्र विशेषज्ञ से इसकी जाँच कराएं। ड्राई आई का सही इलाज आँख की लाली के बजाय उसकी असल वजह पर आधारित होता है।

ड्राई आई क्या है और यह क्यों होती है
ड्राई आई वह स्थिति है जब आँखें काफ़ी आँसू नहीं बना पातीं या आँसू बहुत तेज़ी से सूख जाते हैं। दूसरे शब्दों में इसे ऐसे समझ सकते हैं कि आँसू की परत (टियर फिल्म) आँख पर टिक नहीं पाती।

हमारी आँख से निकलने वाला आँसू पानी, तेल और म्यूकस से मिलकर बनता है जो मिलकर आँख को मुलायम और आरामदायक बनाए रखते हैं। जब यह संतुलन बिगड़ता है, तो आँखों में जलन या चुभन हो सकती है, ऐसा लग सकता है जैसे उनमें रेत चली गई हो, आँखें लाल हो सकती हैं या धुंधला दिख सकता है। कुछ लोगों को बहुत ज़्यादा आँसू आने की शिकायत भी होती है; यह जलन की वजह से होता है जिससे रिफ्लेक्स आँसू निकलते हैं, जो असल में आँख को ठीक से लुब्रिकेट नहीं कर पाते।

इसकी आम वजहों में उम्र बढ़ना, लंबे समय तक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का इस्तेमाल, कॉन्टैक्ट लेंस, सूखी हवा, तेज़ हवा, धुआँ, एयर कंडीशनिंग, पलकों की सूजन, कुछ दवाइयाँ और ऐसी मेडिकल स्थितियाँ शामिल हैं जो आँसू बनने की प्रक्रिया पर असर डालती हैं। साथ ही, जब लोग कंप्यूटर या फ़ोन पर काम करते हुए ध्यान लगाए होते हैं, तो वे कम पलकें झपकाते हैं, जिससे आँसू तेज़ी से सूख जाते हैं।

किसी भी समस्या के होने पर सबसे पहले चिकित्सक से परामर्श ज़रूरी है। ड्राई आई के इलाज के डॉक्टर सबसे पहले यह पता लगाते हैं कि मुख्य समस्या क्या है। आँसू कम बनना, बहुत ज़्यादा सूखना, मेइबोमियन ग्रंथि की समस्या, सूजन या इनमें से कई चीज़ों का मिला-जुला असर आदि। समस्या का पता चलने पर उसी हिसाब से इलाज किया जाता है।

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