बाढ़ की तबाही झेल रहा है लखनऊ और आस-पास का एक बड़ा इलाक़ा

लखनऊ का फ़ैजुल्लाहगंज इलाक़ा भारी बारिश के बाद से अभी तक बाढ़ जैसे हालात का सामना कर रहा है। यहाँ जमा नालों का गंदा और ज़हरीला पानी पूरे इलाक़े की गलियों और घरों में भरा हुआ है। चारों तरफ़ पसरी इस गंदगी के कारण महामारी और गंभीर बीमारियों के फैलने का ख़तरा चरम पर है।

पूरे शहर में गोमती से सटे कई इलाकों में कई फिट तक पानी भरा हुआ है। लखनऊ ने वर्षों के बाद ऐसी बाढ़ का सामना किया है। बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए नावों की सुविधा शुरू की गई है।

रविवार को गोमती नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने से दुबग्गा के जेहटा रोड सहित आसपास के इलाकों में बाढ़ का पानी पहुंच गया। शाम छह बजे तक जेहटा-माल रोड पर करीब डेढ़ फीट पानी बहने लगा था। माल और इटौंजा के ग्रामीण क्षेत्रों में भी हालात बिगड़ते जा रहे हैं। प्रशासन के मुताबिक, अगले 24 घंटे में गोमती का जलस्तर दो फीट तक और बढ़ सकता है।

प्रशासन की टीम ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। पहली मंजिल पर रहने वाले लोगों को दूसरी मंजिल पर शिफ्ट होने और गर्भवती महिलाओं सहित बच्चों व बुजुर्गों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए कहा गया है।

इन हालत में शहर के कई ज़िम्मेदार नागरिक सामने आए हैं और हर संभव सहायता पहुंचने के कामों में जुटे हैं। यह लोग तत्काल प्रभाव से अपनी योजनाओं पर काम करते हुए शेल्टर के अलावा मेडिकल सहायता और राशन और साफ़ पानी की व्यवस्था करने में जुटे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ ग्रामीणों ने अधिकारियों को जानकारी दी है कि बाढ़ से धान, सब्जियों सहित अन्य फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। डीएम ने एक हजार से अधिक बीघा फसल और सब्जियों के नुकसान का सर्वे कराने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने किसानों को सरकारी सहायता का भरोसा दिलाया है।

हालात का जायज़ा लेने के लिए डीएम का काफिला हयात नगर, दौलतखेड़ा और सैथा का निरीक्षण करने के बाद गुलमीखेड़ा, टाड़खेड़ा और सुखलालखेड़ा की ओर बढ़ा ज़रूर मगर जलभराव के चलते इसे वापस लौटना पड़ा। रिपोर्ट्स के मुतबिक सुरक्षा के लिए रात में पेट्रोलिंग बढ़ाने और दाऊद नगर में अतिरिक्त कंट्रोल रूम स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। मगर बदहाली के चलते ग्रामीणों में नाराजगी है।

शहर का फैजुल्लागंज इलाक़ा सबसे अधिक प्रभावित है। मामा चौराहा, अटल चौक, गणेश विहार, नंदन चौराहा सहित कई इलाक़ों में पानी भरा हुआ है। यहाँ के घरों में फंसे लोग जीवन की मूल सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं। उनकी शिकायत है कि घरों में सप्लाई होने वाले पानी में गंदगी और बदबू है। नगर निगम के टैंकर से बाल्टी में पानी भरकर लाया जा रहा है, इसके अलावा मददगार भी सुविधाए जुटाने में लगे हैं मगर संकट के आगे ये सुविधाएं नाकाफी नज़र आ रही हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गोमती की बाढ़ से गुलाला घाट का मार्ग भी बाधित हुआ है। अंत्येष्टि स्थल में तीन दिन से नदी का पानी भरा है। अंतिम संस्कार के लिए पहुँचने वाले लोग चबूतरे तक आने के लिए पानी भरे रस्ते से आने को मजबूर हैं। अमर उजाला कि एक खबर में मुताबिक़ अंत्येष्टि स्थल परिसर में भी करीब एक फीट पानी भरा है और यह लकड़ियों तक पहुंच गया है। घाट की व्यवस्था देखने वाले वीरेंद्र पांडे ने बताया कि पानी भरने से बिजली आपूर्ति बंद है, जिससे विद्युत शवदाह गृह भी बंद है।

खबर के मुताबिक़, आसपास कई लोग बीमार हैं और उन्हें दवाओं की जरूरत है। इन लोगों को शिकायत है कि इलाके में न तो नाव चल रही है और न ही जरूरी सामान पहुंच रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *