हीमोग्लोबिन नॉर्मल होने के बावजूद थकन के एहसास पर क्या कहते हैं एक्सपर्ट

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया में 33 फीसदी महिलाएं, 40 फीसदी गर्भवती महिलाएं और 42 फीसदी बच्चे आयरन की कमी से प्रभावित होते हैं।

जब बहुत ज़्यादा थकान, नींद आने या बाल झड़ने की शिकायत पर जब डॉक्टर के पास जाते हैं, तो हीमोग्लोबिन ब्लड टेस्ट को प्राथमिकता दी जाती है। इस बारे में हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ़ नॉर्मल हीमोग्लोबिन रिपोर्ट से शरीर में आयरन की सही स्थिति का पता नहीं लगाया जा सकता।

ऐसे में एक्सपर्ट फेरिटिन की पड़ताल करते हैं। यह एक तरह का प्रोटीन है जो शरीर के सेल्स में आयरन जमा करता है। जब शरीर में आयरन की कमी होती है तो हीमोग्लोबिन कम होने से बहुत पहले फेरिटिन का भंडार खाली होने लगता है। ध्यान रहे कि खून की कमी को सिर्फ हीमोग्लोबिन से मापना सही नहीं। दरअसल इसका असली राज ‘फेरिटिन’ में छिपा है।

फेरिटिन की कमी के साइलेंट लक्षण की बात करें तो लगातार थकान, सुस्ती, स्किन का पीला या पीला पड़ना, बहुत ज़्यादा बाल झड़ना और ध्यान लगाने में दिक्कत होना जैसे लक्षण कम फेरिटिन के संकेत देते हैं। शरीर में फेरिटिन की कम मात्रा आयरन की कमी का संकेत देती है, जबकि फेरिटिन की ज्यादा मात्रा आयरन की अधिकता (आयरन ओवरलोड) के लिए ज़िम्मेदार होती है।

फेरिटिन की जांच सीरम फेरिटिन ब्लड टेस्ट (Serum Ferritin Blood Test) के तहत की जाती है। इसकी कमी का मुक़ाबला करने के बारे में एक्सपर्ट का मानना है कि केवल आयरन वाली चीज़ें या गोलियाँ खाकर इस कमी को पूरा नहीं किया जा सकता है, बल्कि यह देखना भी ज़रूरी है कि शरीर इसे एब्ज़ॉर्ब कर पा रहा है या नहीं?

आयरन के बेहतर एब्ज़ॉर्प्शन के लिए, डाइट में विटामिन सी और कॉपर/प्रोटीन से भरपूर चीज़ें शामिल करनी चाहिए। ऐसे में एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि चाय या कॉफी को खाने से कम से कम एक घंटा दूर रखें ताकि आयरन एब्जॉर्प्शन में रुकावट न आए। साथ ही, डॉक्टर से सलाह लिए बिना खुद से आयरन सप्लीमेंट्स शुरू करने से बचना चाहिए।

डब्ल्यूएचओ की गाइड लाइन के मुताबिक़, फेरिटिन एक ऐसा महत्वपूर्ण प्रोटीन है जिसे हम शरीर का ‘आयरन बैंक’ भी कह सकते है। इसका काम है शरीर में आयरन को स्टोर करना और जब शरीर को हीमोग्लोबिन बनाने की जरूरत पड़े, तो उस आयरन को नियंत्रित ढंग से मुक्त करना।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार, भारत में 15-49 वर्ष की लगभग 57.2 फीसदी महिलाएं खून की कमी का शिकार हैं जबकि 6-59 महीने के लगभग 53.1 फीसदी बच्चे भी इससे प्रभावित हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया में 33 फीसदी महिलाएं, 40 फीसदी गर्भवती महिलाएं और 42 फीसदी बच्चे आयरन की कमी से प्रभावित होते हैं।

मगर ध्यान रहे कि बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से आयरन सप्लीमेंट न लें, क्योंकि शरीर में आयरन की अधिकता भी नुकसानदायक हो सकती है। ऐसे में ज़रूरी है कि पहले चिकित्सक को दिखाएं और उसके कहने पर जाँच कराएं। इसकी कमी होने की दशा में ही डॉक्टर के परामर्श से सप्लीमेंट का सेवन करें।

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