चीन के इंटरनेट नेटवर्क सूचना केंद्र की 2026 की रिपोर्ट बताती है कि जून 2026 के अंत तक देश में 70 करोड़ से ज्यादा लोग जेनेरेटिव एआई का इस्तेमाल कर रहे थे। इस देश का यह आंकड़ा यहाँ की आधी से ज्यादा आबादीChinese government के बराबर है।
एआई के हरदिन बढ़ते चलन ने चीनी प्रशासन के सामने एक नई समस्या खड़ी कर दी है। दरअसल यहाँ के इंसानों और एआई के बीच बढ़ते रिश्ते ने चीन सरकार की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में एआई कंपैनियन सेवाओं पर नए नियम और सख्त पाबंदियां लगा रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, चीन में एआई की ज़िम्मेदारी अब केवल सवालों के जवाब देने तक नहीं रही, बल्कि लोग इससे दोस्ती कर रहे हैं। दोस्ती भी ऐसी जिसमे अकेलेपन का हल है। स्थियाँ ऐसी हैं कि कुछ चीनी लोग तो इसे अपना वर्चुअल पार्टनर तक मानने लगे हैं। चीनी दुनिया में एआई के बढ़ते चलन की बदौलत अब यहाँ के नागरिक उसे साथी तक मान रहे हैं। तकनीक एक यह नया रूप अब चीनी प्रशासन की चिंता बढ़ा रहा है। लोग एआई से सिर्फ सवाल नहीं पूछ रहे, बल्कि उससे दोस्ती कर रहे हैं, अपनी निजी बातें बता रहे हैं।
बताते चलें कि चीन द्वारा 15 जुलाई, 2026 को ‘इंसानों जैसे’ एआई चैटबॉट्स और वर्चुअल साथी वाले फ़ीचर्स पर दूरगामी राष्ट्रीय नियम लागू किए। इनका मकसद भावनात्मक निर्भरता को कम करना और आबादी से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करना है। आम नागरिकों को सीधे सज़ा देने के बजाय, इन नियमों के तहत एआई कंपनियों पर कड़े कानूनी और ऑपरेशनल प्रतिबंध लगाए गए हैं।
चीन में सरकार हालात के इस रिपोर्ट कार्ड से चिंतित है। अब अगर पुछा जाए कि चीन में एआई का कितना इस्तेमाल होता है या फिर एआई कंपैनियन क्या है? या फिर चीन में इसका बाजार और लोगों पर इसके प्रभाव को लेकर भी तमाम तरह के सवाल सामने आ रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के मुताबिक़, चीन के इंटरनेट नेटवर्क सूचना केंद्र की 2026 की रिपोर्ट बताती है कि जून 2026 के अंत तक देश में 70 करोड़ से ज्यादा लोग जेनेरेटिव एआई का इस्तेमाल कर रहे थे। इस देश का यह आंकड़ा यहाँ की आधी से ज्यादा आबादी के बराबर है।
रिपोर्ट्स बताती हैं कि, दिसंबर 2025 के अंत में जेनेरेटिव एआई यूजर्स की संख्या करीब 60.2 करोड़ थी और इसकी पहुंच 42.8 प्रतिशत थी। यानी कुछ ही महीनों में यूजर्स की संख्या में करीब 16 प्रतिशत का इज़ाफ़ा देखा गया।
एआई के इस्तेमाल पर नज़र डालें तो तकरीबन 76 प्रतिशत यूजर्स एआई से सवालों के जवाब लेते हैं। वहीँ 48 प्रतिशत तस्वीरों और वीडियो से जुड़े कामों के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं जबकि 38 प्रतिशत लोग टेक्स्ट से जुड़े काम करते हैं। आंकड़े बताते हैं कि लगभग 33 प्रतिशत लोग काम का सारांश, मीटिंग नोट्स और प्रेजेंटेशन तैयार करने के लिए एआई का इस्तेमाल करते हैं।
वहीँ चीन की एआई क्षमता की बात करें तो पता चलता है कि इस देश में यूजर्स की संख्या भी सीमित नहीं है। जून 2026 तक देश की इंटेलिजेंट कंप्यूटिंग क्षमता 2,185 ईफ्लॉप्स पहुंच गई थी, जो एक साल पहले की तुलना में 177 प्रतिशत अधिक पाई गई।
ऐसे में एआई और जेनेरेटिव एआई के अंतर की बात करें तो एआई ऐसी तकनीक है जो मशीनों को इंसानों की तरह सीखने, समझने और फैसला लेने में सक्षम बनाती है, जबकि जेनेरेटिव एआई इसी का एक प्रकार है, जो नई सामग्री जैसे टेक्स्ट, तस्वीर, वीडियो, आवाज और कोड तैयार कर सकता है।