देश में एक तिहाई से ज़्यादा लोग फैटी लिवर की समस्या से ग्रस्त- रिपोर्ट

फैटी लिवर भारत में तेज़ी से एक आम समस्या बनता जा रहा है। इसके बारे में हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस बीमारी को जल्दी पहचानना बहुत ज़रूरी है, नहीं तो यह शरीर की सेहत पर गंभीर असर डाल सकती है।

देश में एक तिहाई से ज़्यादा लोग फैटी लिवर की समस्या से ग्रस्त- रिपोर्ट

फैटी लिवर एक ‘साइलेंट बीमारी’ है, जिसके शुरुआती स्टेज में ज़्यादा लक्षण नहीं दिखते। हालांकि, एक बार जब यह बढ़ जाती है, तो शरीर पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है। इसलिए, लाइफस्टाइल में बदलाव, रेगुलर चेक-अप और हेल्दी डाइट इस बीमारी से बचने के सबसे अच्छे तरीके हैं।


जानकार इसके लिए खराब लाइफस्टाइल, अनहेल्दी डाइट, शराब और सिगरेट का सेवन और रोज़ाना फिजिकल इनएक्टिविटी को मुख्य कारण बताते हैं। पीआईबी की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में लगभग 35 से 38% लोग फैटी लिवर की बीमारी से परेशान हैं, जो इस बीमारी की गंभीरता को साफ तौर पर दिखाता है। अध्ययनों से पता चलता है कि भारत में 35-40% वयस्क और लगभग 35% बच्चे फैटी लिवर से प्रभावित हैं।

लक्षण
फैटी लिवर का पहला और सबसे आम लक्षण पेट के आस-पास फैट का बढ़ना है। अगर आपका पेट तेज़ी से बढ़ रहा है, या कमर के हिस्से में फैट जमा हो रहा है, तो यह दिखाता है कि लिवर में फैट जमा हो रहा है। लिवर में फैट बढ़ने का असर धीरे-धीरे शरीर के कामों पर दिखने लगता है।

फैटी लिवर का एक और बड़ा लक्षण लगातार थकान बनी रहना है। इस बीमारी में लिवर अपनी नॉर्मल क्षमता से काम नहीं कर पाता, जिसका सीधा असर शरीर की एनर्जी पर पड़ता है। अगर आपको बिना कोई भारी काम किए दिन भर थकान या कमजोरी महसूस होती है, तो यह लिवर की समस्या का संकेत हो सकता है। इस लक्षण को अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है, लेकिन समय पर इलाज ज़रूरी है।

फैटी लिवर बढ़ने पर लिवर में सूजन आ सकती है, जिससे पेट में दर्द हो सकता है। कई लोगों को भारीपन, दबाव या सूजन महसूस हो सकती है। भूख न लगना भी इस स्थिति का एक लक्षण है।

ये लक्षण मिलकर आंतों की सेहत पर असर डालते हैं और लंबे समय में पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकते हैं। अगर ये लक्षण एक साथ दिखें, तो जांच करवाना बहुत ज़रूरी है।फैटी लिवर मोटापे, मधुमेह, हृदय रोग और लीवर सिरोसिस जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है। फैटी लिवर के लिए कोई विशिष्ट दवा नहीं है, लेकिन जीवनशैली में बदलाव, जैसे कि स्वस्थ आहार और नियमित व्यायाम, इसे नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। 

वसा, चीनी और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें और फलों, सब्जियों और साबुत अनाज पर ध्यान केंद्रित करें। शारीरिक रूप से सक्रिय रहें और नियमित व्यायाम करें। स्वस्थ वजन बनाए रखें, क्योंकि वजन कम करने से भी लाभ हो सकता है। लक्षणों के प्रति जागरूक रहें और समय-समय पर अपने लिवर स्वास्थ्य की जांच करवाएं।

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