बचपन में होने वाले अस्थमा के पीछे कई प्रकार के वसायुक्त खाने भी ज़िम्मेदार होते हैं। एक नए अध्ययन से पता चलता है कि वसायुक्त खाद्य पदार्थ बचपन में अस्थमा की एक वजह हो सकता है।

साइंस ट्रांसलेशनल मेडिसिन पत्रिका में पिछले सप्ताह प्रकाशित शोधकर्ताओं की रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ खाद्य पदार्थों में पाए जाने वाले वसा न्यूट्रोफिलिक अस्थमा से जुड़े होते हैं, जो एक गैर-एलर्जी प्रकार का अस्थमा है जो सूक्ष्मजीवों (microorganisms) और बैक्टीरियल प्रोटीन से शुरू होता है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि एक विशिष्ट प्रकार का संतृप्त वसा अम्ल (saturated fatty acid), जिसे स्टीयरिक (stearic acid) अम्ल कहा जाता है, जो अक्सर पशु वसा और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में पाया जाता है, एक श्रृंखला प्रतिक्रिया शुरू करता है जिससे न्यूट्रोफिलिक अस्थमा हो सकता है।
फिलाडेल्फिया के चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल में एलर्जी और इम्यूनोलॉजी के एक उपस्थित चिकित्सक और वरिष्ठ शोधकर्ता डॉक्टर डेविड हिल ने एक विज्ञप्ति में कहा “इस अध्ययन से पहले, कई लोग सोचते थे कि बचपन में मोटापा इस प्रकार के अस्थमा का कारण बनता है।”
हालांकि, हम उन बच्चों में न्यूट्रोफिलिक अस्थमा देख रहे थे जो मोटे नहीं थे, इसलिए हमें संदेह था कि इसका कोई और कारण हो सकता है।
डॉक्टर हिल ने आगे कहा- “हमने नैदानिक अनुसंधान और बच्चों पर किए गए अध्ययनों में पाया है कि संतृप्त श्रृंखला फैटी एसिड युक्त कुछ खाद्य पदार्थ मोटापे के बिना भी न्यूट्रोफिलिक अस्थमा का कारण बन सकते हैं।”
दरअसल ज़्यादा वसा वाले आहार से वायुमार्ग में सूजन बढ़ती है और फेफड़ों की कार्यक्षमता प्रभावित है, जिससे अस्थमा के लक्षण खराब हो सकते हैं। वहीं, ताज़े फल और सब्जियाँ खाने से फेफड़ों के स्वास्थ्य को बढ़ावा मिलता है और फाइबर युक्त आहार अस्थमा के लक्षणों को सुधारने में मदद कर सकता है।
