इस बात की जानकारी शायद कम ही लोगों के पास होगी कि फीफा वर्ल्ड कप ट्रॉफी में पांच किलोग्राम से अधिक सोना होता है जबकि इसका कुल वज़न छह किलोग्राम से कुछ ही ज़्यादा होता है।
इस ट्रॉफी से संबंधित नियम और शर्ते भी कम दिलचस्प नहीं है। ईटीवी डॉटकॉम की यह रिपोर्ट फीफा वर्ल्ड कप से जुड़ी कुछ ऐसी ही बातों को उजागर करती है। रिपोर्ट के मुताबिक़, आप दुनिया के बेहतरीन फुटबॉल खिलाड़ी होने के बावजूद भी फीफी की ट्रॉफी को टच नहीं कर सकते है। इसकी सबसे बड़ी मिसाल पुर्तगाल के स्टार खिलाड़ी क्रिस्टियानो रोनाल्डो हैं। जो एक बार भी फीफा वर्ल्ड कप नहीं जीत सके हैं। जबकि फीफा वर्ल्ड कप की ट्रॉफी को अपने हाथों से उठाने और उसे चूमने का सपना हर फुटबॉलर का होता है।
खबर की मानें तो कुछ खिलाड़ी ऐसे भी हैं जो कई कई बार ट्रॉफी को चूमने में सफल रहे हैं। हाल ही में खेले गए फीफा वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में स्पेन ने अर्जेंटीना को 1-0 से मात देकर दूसरी बार ट्रॉफी उठाई है।
फीफा की रिपोर्ट से पता चलता है कि फीफा वर्ल्ड कप की असल ट्रॉफी का कुल वजन 6.142 किलोग्राम है। जिसमें से 5.092 किलोग्राम शुद्ध सोना है। सोने की इतनी ज्यादा मात्रा इसे दुनिया के खेलों में सबसे कीमती ट्रॉफी बनाती है।
वर्ल्ड कप की इस कीमती ट्रॉफी को हाथ नहीं लगा सकता है। इसे कुछ खास लोग ही बिना दस्तानों के छू सकते हैं। इनमें फीफा प्रेसिडेंट, जीतने वाली टीम के खिलाड़ी व स्टाफ और देशों के प्रमुख जैसी हस्तियां शामिल हैं। इसके अलावा अन्य को ट्रॉफी छूने के लिए खास दस्ताने पहनने पड़ते हैं। इस नियम का असल मकसद ट्रॉफी में लगे शुद्ध सोने की हिफाज़त करना है।
रिपोर्ट बताती है कि, 1974 के बाद से अब तक के सभी चैंपियनों का नाम भी फीफा ट्रॉफी के निचल प्लेट पर दर्ज है। हर चार साल पर होने वाले इस टूर्नामेंट के फाइनल मैच के बाद ट्रॉफी के निचली प्लेट को हटा दिया जाता है और उस प्लेट को फीफा म्यूजियम के कलेक्शन में सावधानी से रख दिया जाता है। उसके बाद नए चैंपियन के नाम की प्लेट ट्रॉफी के नीचे लगाई जाती है।
मौजूदा ट्रॉफी को पहली बार 1974 में लांच किया गया। इस नई ट्रॉफी को इटली के डिजाइनर सिल्वियो गजानिगा ने नया डिजाइन दिया है। इससे पहले यानी 1970 तक खेले गए फीफा वर्ल्ड कप में जूल्स रिमेट ना की ट्रॉफी दी जाती थी। उस समय जर्मनी ने वर्ल्ड कप जीतकर पहली बार मौजूदा ट्रॉफी को उठाया था। तब से हर चैंपियन इसी ट्रॉफी को उठाता रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, पुरानी ट्रॉफी जूल्स रिमेट को 1970 की चैंपियन ब्राजील को हमेशा के लिए अपने पास रखने की इजाजत दे दी गई।
असली ट्रॉफी को विजेता टीम घर नहीं ले जा सकती है
फीफा वर्ल्ड कप विजेता टीम को एक खास रेप्लिका यानी नकल ट्रॉफी दी जाती है। दरअसल असली ट्रॉफी को चैंपियन टीम अपने घर नहीं ले जा सकती क्यूंकि इसे ज्यूरिख के फीफा म्यूजियम में सुरक्षित रखा जाता है और किसी ख़ास अवसर पर ही इसे निकाला जाता है।