हज़ारों साल पुराने झुमके पहनकर ऐक्ट्रेस ने प्राचीन ईरानी सुनारी कला को सुर्ख़ियों में ला दिया

लगभग तीन हज़ार साल पुराने ईरानी सोने के मेडैलियन (गोल नक्काशीदार टुकड़े) वाले झुमकों ने आधुनिक फैशन में प्राचीन सांस्कृतिक वस्तुओं के इस्तेमाल पर अंतरराष्ट्रीय बहस छेड़ दी है। इससे प्राचीन ईरानी आभूषण बनाने की कला की बारीकियों पर फिर से ध्यान गया है और पुरातत्व संबंधी वस्तुओं के मालिकाना हक, संरक्षण और नैतिक इस्तेमाल पर सवाल उठे हैं।

तेहरान टाइम्स की एक रिपोर्ट बताती है कि यह विवाद तब शुरू हुआ जब अमरीकी एक्ट्रेस ज़ेंडाया मैरी स्टोर्मर कोलमैन ने लंदन में क्रिस्टोफर नोलन की फिल्म ‘द ओडिसी’ के लिए एक फोटो-सेशन के दौरान ये झुमके पहने। इस फिल्म में वह ज्ञान और युद्ध की यूनानी देवी एथेना का किरदार निभा रही हैं।

सीएनएन और ‘पीपल’ मैगज़ीन के अनुसार, इन झुमकों में प्राचीन ईरानी सोने के मेडैलियन डिस्क लगे हैं, जिनके बारे में माना जाता है कि वे पहली सहस्राब्दी ईसा पूर्व के हैं, यानी ये लगभग 3,000 साल पुराने हैं। ये वस्तुएं ‘ज़िविये होर्ड’ (Ziwiye hoard) से जुड़ी हैं, जो प्राचीन उत्तर-पश्चिमी ईरान से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण पुरातात्विक खोजों में से एक है।

माना जाता है कि ये सोने की डिस्क ईरान के कोर्देस्तान प्रांत में ज़िविये के पुरातात्विक स्थल से आई हैं। यह जगह ‘मीड्स’ (Medes) और ‘सिथियन्स’ (Scythians) से जुड़ी एक किलेबंद बस्ती थी।

ज़िविये कलेक्शन को ‘एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका’ ने सातवीं शताब्दी ईसा पूर्व की कलाकृतियों का समूह बताया है। इसे कीमती धातुओं में शुरुआती ईरानी कारीगरी के सबसे बेहतरीन बचे हुए उदाहरणों में से एक माना जाता है।

ये मेडैलियन प्राचीन ईरानी सुनारों की बेहतरीन महारत को दिखाते हैं, जिनकी कला में कलात्मक डिज़ाइन और धातु पर काम करने की उन्नत तकनीकें शामिल थीं। ज़िविये और लौह युग (Iron Age) के अन्य स्थलों से मिली पुरातात्विक खोजों से पता चलता है कि ईरानी कारीगर ‘अकेमेनिड साम्राज्य’ (Achaemenid Empire) के उदय से सदियों पहले ही सोने के बारीक आभूषण, धार्मिक/अनुष्ठानिक वस्तुएं और विलासिता की चीजें बनाते थे।

विशेषज्ञ लंबे समय से प्राचीन ईरान को प्राचीन ‘नियर ईस्ट’ (Near East) में सोने के काम के प्रमुख केंद्रों में से एक मानते रहे हैं। ईरानी पठार के विभिन्न स्थलों से मिली कलाकृतियों से उन्नत तकनीकों का पता चलता है, जिनमें ‘रिपॉसे’ (repoussé) सजावट, हथौड़े से आकार देना (hammering), नक्काशी (engraving), ढलाई (casting) और बारीक सजावटी डिज़ाइन शामिल हैं। इन तकनीकों ने पूरे पश्चिमी एशिया की कलात्मक परंपराओं को प्रभावित किया।

ये झुमके लंदन के ज्वेलर ग्लेन स्पिरो ने बनाए थे। उन्होंने प्राचीन सोने की डिस्क को आधुनिक 18-कैरेट पीले सोने की सेटिंग में जड़ा और उनके चारों ओर हीरे लगाए। माना जाता है कि ये टुकड़े उनके “मटेरियल्स ऑफ़ द ओल्ड वर्ल्ड” (Materials of the Old World) कलेक्शन का हिस्सा थे, जिसमें अलग-अलग सभ्यताओं की ऐतिहासिक वस्तुओं को आधुनिक आभूषणों में शामिल किया जाता है। कई पुरातत्वविदों, इतिहासकारों और सोशल मीडिया यूज़र्स का कहना था कि इतनी ऐतिहासिक अहमियत वाली चीज़ें म्यूज़ियम में रखी जानी चाहिए, न कि उन्हें निजी गहनों की तरह पहना जाना चाहिए।

एक सोशल मीडिया यूज़र ने लिखा कि ईरान की 3,000 साल पुरानी बालियों को ईरान वापस कर देना चाहिए या कम से कम किसी म्यूज़ियम में सुरक्षित रखना चाहिए। उनका तर्क था कि किसी भी व्यक्ति को ऐसी ऐतिहासिक चीज़ें नहीं पहननी चाहिए जो इंसानी सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा हों।

कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि क्या इन चीज़ों को ईरान से कानूनी तौर पर लाया गया था और आशंका जताई कि शायद इन्हें लूटा गया हो। वहीं, कुछ लोगों का तर्क था कि पुरानी चीज़ों को पहनने लायक गहनों में बदलने से ऐतिहासिक कारीगरी को सुरक्षित रखने और आधुनिक लोगों के सामने पेश करने में मदद मिल सकती है।

इस बहस ने ज़िविये (Ziwiye) की ऐतिहासिक चीज़ों के इतिहास की भी नए सिरे से पड़ताल शुरू कर दी है।

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