भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, पहली जून से 9 सितंबर के बीच बारिश भारत में होने वाली औसत बारिश से 15 फीसद कम रही है। अल नीनो की वजह से आमतौर पर साउथ एशिया, साउथईस्ट एशिया, ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका में मौसम सूखा रहता है। इस साल, ‘अल नीनो’ की वजह से भारत में गर्मियों में मानसून की बारिश उम्मीद से कम हुई है।
प्रशांत महासागर में शक्तिशाली रूप ले चुका वेदर सिस्टम ‘अल नीनो’ अब ‘सुपर अल नीनो’ में बदल रहा है जिसका असर अब पूरी दुनिया पर पड़ता साफ नज़र आ रहा है। यूनाइटेड नेशंस के सेक्रेटरी-जनरल एंटोनियो गुटेरेस का कहना है कि वेदर सिस्टम ‘एल नीनो’ हमारी आंखों के सामने बहुत ज़्यादा तेज़ी से बढ़ रहा है, धरती ऐसी अजीब और अनजानी स्थिति का सामना कर रही है जिसकी पहले कभी कोई मिसाल नहीं मिली और ये हालात और तेज़ होते जा रहे हैं।
हर 2 से 7 साल में बनने वाला वेदर सिस्टम ‘अल नीनो’, सेंट्रल और ईस्टर्न पैसिफिक ओशन में समुद्र के पानी का तापमान बढ़ाता है। इस साल का ‘अल नीनो’ जून में पानी की सतह के तापमान में 2 डिग्री सेल्सियस से ज़्यादा की बढ़ोतरी के कारण बनना शुरू हुआ था। इस वेदर सिस्टम की एवरेज लाइफ डेढ़ साल या 18 महीने होती है, और ताज़ा खबर यह है कि यह वेदर सिस्टम अब एक पावरफुल रूप ले चुका है और ‘सुपर अल नीनो’ में बदल गया है।
अनुमान है कि यह वेदर सिस्टम अगले साल 2027 की शुरुआत में अपनी पावर के पीक पर होगा और चिंताजनक इसलिए है कि यह अब तक के सबसे पावरफुल ‘अल नीनो’ में से एक होगा। यूएस मौसम विभाग के मुताबिक, इस ‘सुपर एल नीनो’ के तहत, एक तरफ ईस्ट अफ्रीका और साउथ अमरीका में बहुत ज़्यादा भारी बारिश हो सकती है, तो दूसरी तरफ, इसी वेदर सिस्टम की वजह से साउथ एशिया, साउथईस्ट एशिया, ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका में गंभीर सूखे का खतरा है।
रिपोर्ट बताती हैं कि इस अल नीनो की वजह से दुनिया भर में टेम्परेचर में बढ़ोतरी का ट्रेंड देखा जा रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस साल एल नीनो की वजह से साउथ इथियोपिया, सेंट्रल और साउथ सोमालिया और नॉर्थईस्टर्न केन्या में नॉर्मल से ज़्यादा बारिश होने की 90 प्रतिशत से ज़्यादा संभावना है।
अनुमान है कि इस बारिश से इस इलाके की सालाना बारिश का 70 परसेंट तक हिस्सा हो सकता है, जिसका मतलब है कि बारिश से बड़े पैमाने पर बाढ़ भी आ सकती है। इसी तरह इस वेदर सिस्टम के तहत इक्वाडोर, उत्तरी पेरू, दक्षिणी ब्राज़ील, उरुग्वे और उत्तर-पूर्वी अर्जेंटीना में भारी बारिश होने की उम्मीद है।
भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, पहली जून से 9 सितंबर के बीच बारिश भारत में होने वाली औसत बारिश से 15 फीसद कम रही है। अल नीनो की वजह से आमतौर पर साउथ एशिया, साउथईस्ट एशिया, ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका में मौसम सूखा रहता है। इस साल, ‘अल नीनो’ की वजह से भारत सहित पाकिस्तान में गर्मियों में मानसून की बारिश उम्मीद से कम हुई है।
इस साल इंडोनेशिया में सूखे मौसम और जंगल की आग के लिए ‘एल नीनो’ को ज़िम्मेदार माना जा रहा है। जुलाई के आखिर तक, इंडोनेशिया में जंगल में आग लगने की 5,000 से ज़्यादा घटनाएं रिकॉर्ड की गईं। ऑस्ट्रेलिया में, दक्षिणी और पूर्वी इलाकों में भी औसत से कम बारिश का अनुमान है, जबकि तापमान बढ़ रहा है और जंगल में आग लगने का खतरा बढ़ रहा है।
इसके साइड इफ़ेक्ट में फ़सलों का खराब होना शामिल है, वर्ल्ड फ़ूड प्रोग्राम ने चेतावनी दी है कि एल नीनो 2027 तक कम से कम 49 मिलियन और लोगों को भूखा रख सकता है, जिसका मतलब है कि 45 देशों में भूखे लोगों की कुल संख्या 225 मिलियन से बढ़कर 274 मिलियन हो सकती है।
यूनाइटेड नेशंस के फ़ूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइज़ेशन के अनुसार, मक्का, चावल और बारिश पर निर्भर दूसरी फ़सलों को एल नीनो से सबसे ज़्यादा खतरा है। सूखे हालात दक्षिणी अफ़्रीका से लेकर दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया तक फ़सलों के लिए खतरा हैं।