इस सर्वे में ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गई है

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए जनता का समर्थन गिरकर 32 प्रतिशत हो गया है। यह उनके राजनीतिक करियर का सबसे निचला स्तर है। यह जानकारी एक रॉयटर्स के इप्सोस पोल के ज़रिए सामने आई है। व्हाइट हाउस ने डेटा को खारिज करते हुए अर्थव्यवस्था को मजबूत बताया है।

जानकार इसके लिए जिन कारणों को ज़िम्मेदार मान रहे हैं उनमें बढ़ती महंगाई और ईरान के साथ होने वाला युद्ध है। रविवार को खत्म हुए चार दिन के सर्वे में पाया गया कि 73 प्रतिशत रिपब्लिकन ने ऑफिस में ट्रंप के कुल कामकाज को सही माना। यह पिछले हफ्ते हुए रॉयटर्स/इप्सोस पोल में दर्ज 82 प्रतिशत रेटिंग से कम है, जब उनकी कुल अप्रूवल रेटिंग 35 प्रतिशत थी।

ट्रंप ने महंगाई कम करने और विदेशी युद्धों को खत्म करने के वादों के साथ प्रचार करने के बाद जनवरी 2025 में व्हाइट हाउस में वापसी की थी। शपथ ग्रहण समारोह के तुरंत बाद किए गए रॉयटर्स/इप्सोस पोल में उनकी अप्रूवल रेटिंग 47 प्रतिशत दर्ज की गई थी।

ताजा पोल में शामिल लोगों में से केवल 17 प्रतिशत ने महंगाई से निपटने के उनके तरीके का समर्थन किया। इस वर्ष 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों (मिडटर्म इलेक्शन) में वोटर्स के लिए यह मुद्दा सबसे अहम बना हुआ है, जिसमें ट्रंप की पार्टी के रिपब्लिकन नेताओं को कांग्रेस के दोनों सदनों में अपनी मामूली बढ़त को बचाए रखना है।

फरवरी में ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू करने के बाद से आर्थिक हालात को लेकर रिपब्लिकन के बीच निराशा बढ़ी है। इस कदम के कारण पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई। पहली बार, महंगाई से निपटने के उनके तरीके को नापसंद करने वाले रिपब्लिकन की संख्या इसे पसंद करने वालों से ज्यादा हो गई है, जो 51 प्रतिशत बनाम 44 प्रतिशत है।

यह अप्रूवल रेटिंग उनके डेमोक्रेटिक पूर्ववर्ती जो बाइडन के लिए दर्ज किसी भी आंकड़े से कम है। बाइडन का कार्यकाल भी बढ़ी हुई महंगाई से प्रभावित हुआ था और उन्होंने आखिरकार अपनी उम्र को लेकर चिंताओं के बीच एक मुश्किल डिबेट परफॉर्मेंस के बाद दोबारा चुनाव लड़ने का अभियान खत्म कर दिया था।

रॉयटर्स/इप्सोस सर्वे से पता चला कि जब रजिस्टर्ड वोटर्स से मध्यावधि चुनावों के लिए उनके वोटिंग इरादों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने रिपब्लिकन के मुकाबले डेमोक्रेट्स को ज्यादा पसंद किया जिसकी संख्या 43 प्रतिशत बनाम 35 प्रतिशत रही।

रिपोर्ट के मुताबिक़, आठ अंकों की यह बढ़त इस साल अब तक रॉयटर्स/इप्सोस पोलिंग में डेमोक्रेट्स के लिए सबसे बड़ा अंतर है। अगर कांग्रेस के किसी भी सदन पर नियंत्रण हाथ से निकल जाता है, तो ट्रंप के लिए अपने कार्यकाल के आखिरी दो सालों में अपना एजेंडा लागू करना बहुत मुश्किल हो सकता है।

कानूनी वोटिंग के इरादों पर ये नतीजे एक बड़ी तस्वीर दिखाते हैं कि अमरीकी किस राजनीतिक पार्टी को नेतृत्व करते देखना चाहते हैं, हालांकि ये आंकड़े अलग-अलग राज्यों और जिलों के चुनावों की उन स्थानीय स्थितियों को नहीं दिखाते जो सीनेट और हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स पर नियंत्रण तय करती हैं।

इमिग्रेशन (प्रवास) का मुद्दा ट्रंप के समर्थकों के बीच उनके लिए मज़बूत पक्ष बना हुआ है, और 79 प्रतिशत रिपब्लिकन उनके इस विचार का समर्थन करते हैं। हालांकि, कुल मिलाकर सिर्फ़ 36 प्रतिशत अमरीकी इस मुद्दे पर उनके नज़रिए का समर्थन करते हैं, जबकि 55 प्रतिशत लोग इससे सहमत नहीं हैं।

कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने चेतावनी दी है कि लोगों को ज़बरदस्ती देश से बाहर निकालने की सख़्त कोशिशों से वे वोटर दूर हो सकते हैं जिनके परिवार के तार हाल ही में आए प्रवासियों से जुड़े हैं, जिनमें हिस्पैनिक वोटर भी शामिल हैं। आम जनता में से सिर्फ़ 24 प्रतिशत लोग ईरान से जुड़े विवाद को संभालने के उनके तरीके का समर्थन करते हैं।

गौरतलब है कि इस ऑनलाइन रॉयटर्स/इप्सोस पोल में पूरे अमरीका से 1,277 वयस्कों की राय ली गई और इसमें 3 प्रतिशत अंक की त्रुटि की गुंजाइश है। अमरीकन रिसर्च ग्रुप द्वारा 16-20 सितंबर के बीच 1,100 अमरीकी वयस्कों के बीच किए गए एक और पोल में ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग और भी कम थी। उस सर्वे में राष्ट्रपति की कुल अप्रूवल रेटिंग 29 प्रतिशत रही।

इस बीच व्हाइट हाउस ने डेटा को खारिज करते हुए अर्थव्यवस्था को मजबूत बताया है।

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