गृह मंत्रालय की नई एडवाइजरी में मानव तस्करी विरोधी अभियान तेज करने का निर्देश

गृह मंत्रालय द्वारा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मानव तस्करी से निपटने के लिए तकनीक पर आधारित तरीका अपनाने के निर्देश दिए गए हैं। ये आदेश सभी प्रदेश के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों को दिए गए हैं। गृह मंत्रालय ने पीड़ितों की पहचान करने के व्यापक प्रोटोकॉल बनाने का आह्वान किया है।


मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, मंत्रालय ने हाल ही में जारी अपनी एडवाइजरी में जांच अधिकारियों से विशेष रूप से बीएनएस की धारा 111 की प्रासंगिकता की जांच करने के लिए कहा है। बताते चलें कि यह संगठित अपराध से संबंधित है और इसके दायरे में मानव तस्करी भी आती है।

एडवाइजरी में राज्य पुलिस से साइबर पेट्रोलिंग बढ़ाने के लिए भी कहा गया है। रिपोर्ट्स में एडवाइजरी में बच्चों और एक से अधिक पीड़ितों से जुड़े मामलों सहित मानव तस्करी के मामलों में बीएनएस की धारा 143 और 144 को सख्ती से लागू करने का आह्वान किया गया है।

बताते चलें कि धारा 143 के तहत, धमकी, बल, जबरदस्ती, अपहरण, धोखाधड़ी, छल, सत्ता के दुरुपयोग या प्रलोभन जैसे तरीकों का उपयोग करके शोषण के वास्ते किसी व्यक्ति की भर्ती करने, उसे ले जाने, छिपाने, स्थानांतरित करने या प्राप्त करने को मानव तस्करी के रूप में परिभाषित किया गया है।

ईटीवी की एक खबर के मुताबिक़, ‘मानव तस्करी का मुकाबला करने’ पर जारी एडवाइजरी में, गृह मंत्रालय ने एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स को मजबूत करने, पीड़ितों की पहचान में सुधार करने और तस्करी नेटवर्क को ट्रैक करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करने के अलावा, भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के अधिक उपयोग का आह्वान किया है।

ख़बरों के अनुसार, यह प्रावधान संगठित अपराध के लिए वैधानिक शर्तों को पूरा करने पर तस्करी से जुड़ी गैरकानूनी गतिविधि जारी रखने पर लागू हो सकता है। आदेश में इस बात पर जोर दिया है कि नए आपराधिक कानूनों का असर काफी हद तक जमीनी स्तर पर उनके लागू होने पर निर्भर करेगा।

राज्यों से आग्रह करते हुए गृह मंत्रालय ने जाँच को निचले स्तर के अपराधियों से आगे बढ़ाकर मानव तस्करी नेटवर्क के फाइनेंसर (वित्तपोषक), ऑर्गनाइजर (संचालकों) और अन्य सदस्यों की पहचान करने की बात कही है। मंत्रालय ने ऐसे आपराधिक अभियानों से जुड़ी संपत्तियों का पता लगाने और उन्हें जब्त करने पर भी जोर दिया है।

एडवाइजरी में कहा गया है, “एन्क्रिप्टेड चैट, वित्तीय लेनदेन और जियोलोकेशन डेटा सहित डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित करने के लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 के प्रावधानों का उपयोग किया जाना चाहिए।”

एडवाइजरी में तलाशी और छापेमारी के दौरान तकनीक के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया है। यह बीएनएसएस के तहत तलाशी और जब्ती के अभियानों की अनिवार्य रूप से ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग करने की मांग करता है और बचाव तथा छापेमारी के अभियानों के दौरान फोरेंसिक साक्ष्य जुटाने पर जोर देता है।

मंत्रालय ने राज्यों से इन इकाइयों में पर्याप्त कर्मचारी होने की बात को सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। साथ ही उनकी विशेषज्ञता के अलावा महज़ औपचारिक ढांचे के रूप में काम करने के बजाय फील्ड ऑपरेशंस में सक्रिय रूप से शामिल होने की भी बात कही गई है।

गृह मंत्रालय द्वारा पीड़ितों की पहचान करने के व्यापक प्रोटोकॉल बनाने के आह्वान पर उन पुरुषों और लड़कों पर ध्यान देने की बात खासतौर पर कही गई है जिन्हें मजदूरी कराने के लिए तस्करी का शिकार बनाया जा सकता है।

साथ ही पुलिस और श्रम अधिकारियों को उच्च जोखिम वाले उद्योगों में नियमित निरीक्षण करने और तस्करी के मार्गों और संवेदनशील इलाकों की पहचान करने के लिए CCTNS और Cri-MAC जैसे डेटाबेस का उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।

एडवाइजरी में पंचायतों को भी अनधिकृत एजेंटों की पहचान करने और उनकी रिपोर्ट करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। साथ ही अवैध रूप से विदेश जाने पर सामुदायिक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने और e-Migrate पोर्टल का अधिक से अधिक उपयोग करने का आह्वान किया गया है।

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