आजकल प्रोटीन पाउडर और सप्लीमेंट के बढ़ते इस्तेमाल पर मेडिकल एक्सपर्ट चेतावनी देते हुए कह रहे हैं कि इसका लिवर पर बुरा असर पड़ सकता है। इन लोगों का मानना है कि एक से ज़्यादा सप्लीमेंट इस्तेमाल करने से लिवर पर दबाव बढ़ने के साथ इसका टॉक्सिक असर भी हो सकता है।
एक हेल्दी शरीर के लिए एक्सरसाइज़ और बैलेंस्ड डाइट ही काफी है, वहीं इन दिनों मेडिकल एक्सपर्ट के मुताबिक, लिवर शरीर में प्रोटीन को इस्तेमाल लायक बनाने, नुकसानदायक चीज़ों को बाहर निकालने और एनर्जी बैलेंस बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। अगर लिवर पर ज़्यादा लोड पड़ता है, तो यह प्रोसेस प्रभावित हो सकता है।
एक जनरल नज़रिये के मुताबिक, आम लोगों के लिए हर दिन प्रोटीन की सही मात्रा शरीर के वज़न के हिसाब से 1 से 1.5 ग्राम प्रति किलोग्राम है। लेकिन सबसे बेहतर यह होता है कि इसके लिए अपने फिजिशयन से परामर्श लेकर सेवन किया जाए।
जो लोग बहुत ज़्यादा फिजिकल एक्टिविटी करते हैं, उन्हें निर्धारित मात्रा से थोड़ी ज़्यादा ज़रूरत हो सकती है, हालांकि, ज़्यादा प्रोटीन लेने से ज़रूरी नहीं कि परफॉर्मेंस बढ़े, बल्कि लिवर और किडनी पर दबाव बढ़ सकता है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि प्रोटीन, क्रिएटिन (रोज़ाना 3 से 5 ग्राम) और प्रोटीन सप्लीमेंट सीमित मात्रा में फायदेमंद हो सकते हैं, लेकिन ख़राब क्वालिटी या नकली प्रोडक्ट नुकसानदायक हो सकते हैं। एक से ज़्यादा सप्लीमेंट इस्तेमाल करने से टॉक्सिक असर भी हो सकता है और लिवर पर दबाव बढ़ सकता है।
लिवर स्ट्रेस के लक्षणों में थकान, जी मिचलाना, भूख न लगना, आंखों या स्किन का पीला पड़ना, गहरे रंग का यूरिन और पेट दर्द शामिल हैं। मेडिकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि लिवर को हेल्दी रखने के लिए बैलेंस्ड डाइट, भरपूर पानी पीना और रेगुलर मेडिकल चेक-अप बहुत ज़रूरी हैं।
ऐसे में मेडिकल एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि अंडे, मछली, दालें, कच्ची सब्जियां और फल जैसे नैचुरल फूड रेगुलर खाने चाहिए और सप्लीमेंट्स को ज़रूरत के हिसाब से और स्पेशलिस्ट डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही डाइट में शामिल करना चाहिए।