आखिर क्या चाहता है ओटीटी का दर्शक? जानें इस सर्वे से…

इंटरनेशनल ओटीटी प्लेयर्स जैसे नेटफ्लिक्स या फिर एमेजन प्राइम की बात करें तो दोनों ने करीब 30 ओरिजनल फिल्में या सीरीज़ लॉकडाउन के दौरान रिलीज़ कीं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को लेकर जल्द ही दिशा निर्देश जारी करने वला है। देश में ओटीटी प्लेटफॉर्म के बढ़ते क्रेज और इससे जुड़ते विवादों पर सर्किल नाम की संस्था ने एक सर्वे किया।

इस सर्व में लोगों से ओटीटी प्लेटफॉर्म से जुड़ी अच्छाइयां और बुराइयां पूछी गयीं।लोकल सर्किल के इस सर्वे में देश के करीब 311 जिलों के 50 हजार से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया। इस विषय पर कई सवालों और ज्वलंत मुद्दों से जुड़े जवाब सामने आये हैं। आप भी इनका जायज़ा लें-

  • कंटेंट चुनने की आजादी अपने हाथ में आ गयी जबकि ओटीटी से पहले दर्शक को क्या और कब देखना है, यह पहले से ही तय होता था।
  • 76% ने कहा कि उन्होंने दो और ज्यादा OTT प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया।
  • 30% लोगों ने बताया कि उन्होंने चार OTT प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया। 20% ने कहा कि तीन, 26 प्रतिशत ने कहा कि दो और 18% ने कहा कि उन्होंने सिर्फ एक OTT प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया।
  • इसके साथ ही लोगों ने बताया कि कुछ प्लेटफॉर्म का सब्सक्रिप्शन उन्होंने ट्रायल के लिए लिया, या फिर सिर्फ किसी एक विशेष फिल्म या सीरीज़ को देखने के लिए लिय।
  • सर्वे में शामिल 41% लोगों ने कहा कि साल 2020 में उनके मनोरंजन का मुख्य सोर्स ओटीटी प्लेटफॉर्म ही थे।
  • 50% लोगों ने कहा कि उन्होंने वजह चुनने की आजादी और सुविधा के चलते ओटीटी प्लेफॉर्म को तरजीह दी।
  • 31 प्रतिशत ने हाई क्ववालिटी कंटेंट को पहली वजह बताया।
  • 10% ने कहा कि यह दूसरे चैनलों के मुकाबले सस्ता पड़ रहा था।
  • नौ प्रतिशत इसके लिए कोई ठोस कारण नहीं बता पाए।
  • 46% ने कहा कि टेलिविजन चैनल, डीटीएच, केबल का उन्होंने इस्तेमाल किया।
  • 8% ने कहा कि सोशल मीडिया जैसे टिकटॉक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म पर उन्होंने ज्यादा समय दिया।
  • तीन प्रतिशत लोगों ने बताया कि उन्होंने इंटरनेस से वीडियो डाउनलोड करके देखे।
  • दो प्रतिशत ने अन्य विकल्पों की बात कही।

ओटीटी से जुड़े कलाकारों को मिलने वाली धमकियों पर 55% लोगों ने हां कहा कि कलाकारों, प्रोडसर्स और डायरेक्टर्स को धमकिंयां मिलना चिंता की बात है। वहीं 15 प्रतिशत ने कहा कि यह किसी हद तक उन्हें प्रभावित करता है। 12 प्रतिशत ने कहा कि इससे उन्हें फर्क नहीं पड़ता। तीन प्रतिशत ने इस पर जवाब देने से इनकार कर दिया।

अभी ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए अलग से कोई कानून नहीं है। हाल ही में यह मुद्दा राज्यसभा में भी उठा था। सूचना प्रसारण मंत्रालय ने ओटीटी प्लेट फॉर्म को अपने अधिकार क्षेत्र में लिया था। वहीं पिछले साल सितंबर महीने में 17 अलग अलग ओटीटी प्लेटफॉर्म ने सेल्फ रेग्युलेशन को अपनाया था।

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