18 साल बाद दोबारा दिखेगा आसमान पर आज नज़र आने वाला स्‍ट्राबेरी मून

आज बुधवार की रात खगोल विज्ञान की दुनिया में कुछ बेहद खास होने वाला है। आज की रात आसमान में एक अद्भुत नजारा देखा जा सकेगा। आज की रात आसमान में स्ट्राबेरी मून अपनी चांदनी बिखेरेगा।

18 साल बाद दोबारा दिखेगा आसमान पर आज नज़र आने वाला स्‍ट्राबेरी मून

खगोल जानकारों के अनुसार, पश्चिम में आज शाम सूर्य के ढलते ही पूर्वी आकाश में पूर्णिमा का चंद्रमा उदित होगा। इसे स्‍ट्राबेरी मून नाम दिया गया है।

पूर्णिमा के अवसर पर होने वाली इस दुर्लभ खगोलीय घटना में आसमान में स्ट्राबेरी मून नज़र आएगा। इसे स्‍ट्राबेरी मून नाम दिए जाने का कारण भले ही पाश्चात्य हो मगर इस घटना को दुनियाभर में इसी नाम से लोकप्रियता मिली है। इसे यह नाम पश्चिमी देशों में इस समय पकने वाली जंगली स्‍ट्राबेरी के कारण दिया गया है। हालांकि कुछ देशों में इसे हॉट मून, रोज मून, मीड मून भी कहा जाता है

बताते चलें कि भारतीय समयुनसार यह खगोलीय स्थिति दोपहर एक बजकर 13 मिनट पर होगी। उस समय भारत में दिन होगा। भारत में ये चांद 11 जून की शाम को सूरज ढलने के बाद दिखना शुरू हो जाएगा। शाम 7 बजे के बाद इसे देखा जा सकता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक़, सूरज के अस्त होने के बाद पश्चिमी देशों में पूर्व दिशा में उदित होते इस स्ट्राबेरी मून को देखा जा सकता है। ये मध्‍यरात्रि में बिलकुल ऊपर आने के बाद गुरुवार को भोर में पश्चिम में अस्‍त हो जाएगा।

क्यूंकि यह एक ‘माइक्रो मून’ है, जिसका अर्थ है कि चांद आज पृथ्वी से अपनी कक्षा में सामान्य से थोड़ा ज्यादा दूर होगा। दूरी ज्यादा होने की वजह से ये हमें रोज़ की तुलना में थोड़ा छोटा और हल्का धुंधला नज़र आएगा।

रिपोर्ट्स से यह भी पता चलता है कि पूर्णिमा के चांद का महीने के बदलने और मौसम की जानकारी का समय बताने के लिए आकाशीय घड़ी के रूप में उपयोग किया जाता रहा है।

लगभग हर 20 साल में स्‍ट्राबेरी मून और समर सोलिस्‍टस की घटना एक साथ होती है। क्यूंकि यह कोई आम पूर्णिमा का चांद नहीं है, बल्कि एक ऐसी खगोलीय घटना है जो अब 18 वर्ष बाद 2043 में ही देखने को मिलेगी। यदि आप शहर के प्रदूषण से दूर, किसी खुली जगह पर जाकर इसे देखेंगे तो यह और भी साफ नज़र आएगा।

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