डिप्रेशन से मुक़ाबले में प्रोसेस्ड फ़ूड से बचना मददगार हो सकता है: स्टडी

अपनी डाइट में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फ़ूड की मात्रा कम करना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि ये खाने में बहुत स्वादिष्ट, सस्ते और आसानी से मिलने वाले होते हैं। अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फ़ूड डोपामाइन (एक ‘प्लेज़र हार्मोन’) को ट्रिगर करते हैं, जिससे और खाने की इच्छा बढ़ती है। फ़ूड कंपनियाँ वैज्ञानिकों के साथ मिलकर चीनी, नमक और फ़ैट की ऐसी सही मात्रा तय करती हैं, जिससे आपको और ज़्यादा खाने का मन करे। स्टडी के हवाले से यह विचार न्याशा चागवेडेरा, असिस्टेंट प्रोफ़ेसर, UCSF डिपार्टमेंट ऑफ़ साइकियाट्री एंड बिहेवियरल साइंसेज़ ने प्रस्तुत किए।

एक स्टडी से पता चला है कि बहुत ज़्यादा प्रोसेस्ड फ़ूड या फ़ास्ट फ़ूड का इस्तेमाल काफ़ी कम करने से डिप्रेशन के लक्षणों में सुधार हो सकता है। रिसर्चर्स के अनुसार, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फ़ूड कम करने के दौरान डिप्रेशन के लक्षणों के तीन अलग-अलग मेजर्स में मीडियम से लेकर काफ़ी सुधार देखा गया, जबकि एंग्ज़ायटी के लक्षण भी कुछ कम हुए।

इस शोध के दौरान, पार्टिसिपेंट्स ने चार हफ़्तों तक अपनी रेगुलर डाइट ली, जबकि अगले चार हफ़्तों के दौरान उन्होंने बहुत ज़्यादा प्रोसेस्ड फ़ूड कम करने पर आधारित डाइट फ़ॉलो की, जिसके दौरान बहुत ज़्यादा प्रोसेस्ड फ़ूड का इस्तेमाल 85% से ज़्यादा कम हो गया।

रिसर्चर्स का कहना है कि डाइट और डिप्रेशन के बीच संभावित लिंक गट-ब्रेन कनेक्शन, शरीर में सूजन और न्यूट्रिशनल क्वालिटी की वजह से हो सकता है, लेकिन अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स और डिप्रेशन के बीच सीधा कारण अभी तक साबित नहीं हुआ है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक़, स्टडी का मकसद यह साबित करना नहीं था कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स सीधे डिप्रेशन का कारण बनते हैं। स्टडी में सिर्फ़ 20 लोग शामिल थे और यह कम समय के लिए थी, इसलिए रिसर्चर्स का कहना है कि इस टॉपिक पर बड़े पैमाने पर और लंबे समय तक स्टडी करने की ज़रूरत है।

मेडिकल एक्सपर्ट्स ने साफ किया है कि डिप्रेशन एक गंभीर मेडिकल कंडीशन है और डाइट को इलाज, दवा या साइकोथेरेपी का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। इलाज में बदलाव सिर्फ़ डॉक्टर की सलाह से ही किए जाने चाहिए।

स्टडी में गंभीर डिप्रेशन वाले 20 एडल्ट्स शामिल थे जो रेगुलर तौर पर बहुत ज़्यादा प्रोसेस्ड फ़ूड (चिकन, फ़ास्ट फ़ूड) खाते थे।रिसर्चर्स के मुताबिक, स्टडी के दूसरे फेज़ में 2028 में पार्टिसिपेंट्स को एनरोल करने की उम्मीद है।

यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया, सैन फ़्रांसिस्को के रिसर्चर्स द्वारा की गई यह शुरुआती स्टडी मेडिकल जर्नल JAMA साइकियाट्री में पब्लिश हुई है। अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स में पैकेज्ड स्नैक्स और मिठाइयाँ, मीठे ड्रिंक्स, फास्ट फूड, होटल का खाना, कुछ पैकेज्ड बेकरी प्रोडक्ट्स और प्रोसेस्ड मीट शामिल थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *