तेज हीटवेव न सिर्फ फिजिकल हेल्थ बल्कि मेंटल और इमोशनल सेहत पर भी असर डाल रही हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, लगातार ज़्यादा तापमान की वजह से लोगों में चिड़चिड़ापन, एंग्जायटी, थकान, मेंटल स्ट्रेस और नींद की दिक्कतें तेज़ी से बढ़ रही हैं।
मेडिकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि गर्मी के दौरान शरीर लगातार खुद को ठंडा रखने की कोशिश करता है, जिससे फिजिकल थकान और मेंटल स्ट्रेस होता है। पसीना आना, बोरियत, बेचैनी और नींद की कमी का इंसान के मूड और सहनशक्ति पर बुरा असर पड़ता है।
वर्ल्ड हेल्थ ओर्गनइजेशन के मुताबिक, शरीर को ठीक से आराम करने के लिए तापमान करीब 24 डिग्री होना चाहिए। लेकिन आंकड़े बताते हैं कि शहरों में रात का तापमान लगातार बढ़ रहा है।
काउन्सिल फॉर एमरजेंसी इन्वॉयरमेंट एंड वाटर (CEEW) के अनुसार, पिछले दशक में भारत के करीब 70 प्रतिशत जिलों में गर्म रातों की संख्या बढ़ी है। यानी शरीर को ठंडा होने का समय कम हो गया है।
एक्सपर्ट के मुताबिक़, करीब 60 फीसद भारतीय जिले अब हाई या वेरी हाई हीट रिस्क में हैं। और गर्म रातें इस जोखिम को और बढ़ा रही हैं, क्योंकि इस बढ़े तापमान के कारण शरीर को ठीक होने का मौका नहीं मिल रहा है।
मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, गर्मी के दौरान रात में अच्छी नींद न लेना भी एंग्जायटी और चिंता का एक बड़ा कारण है। बहुत से लोग बार-बार जागते हैं या पूरी नींद नहीं ले पाते, जिससे मेंटल थकान, कॉन्संट्रेशन में कमी और एंग्जायटी बढ़ जाती है।
डिहाइड्रेशन यानी पानी की कमी से भी मेंटल परफॉर्मेंस पर असर पड़ता है। बहुत ज़्यादा गर्मी या हीटवेव के दौरान, डिहाइड्रेशन से सिरदर्द, कमजोरी, चिड़चिड़ापन, दिल की धड़कन तेज़ होना और घबराहट जैसे लक्षण हो सकते हैं, जो मेंटल स्ट्रेस को और बढ़ा देते हैं।
बहुत ज़्यादा गर्मी की वजह से लोग अपने घरों में बंद हैं, जिससे फिजिकल एक्टिविटी और सोशल मेलजोल कम हो जाता है। मेडिकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस स्थिति से उदासी, अकेलापन और मेंटल स्ट्रेस बढ़ सकता है, खासकर उन लोगों में जो पहले से ही एंग्जायटी या डिप्रेशन से जूझ रहे हैं।
इन हालत में एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि गर्मियों में ज़्यादा पानी पिएं, ठंडी जगह पर आराम करें, कैफीन कम लें और सुबह या शाम को हल्की एक्सरसाइज करें। गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज, मेडिटेशन और स्क्रीन टाइम कम करने से भी मेंटल शांति में मदद मिल सकती है।