जर्नल ऑफ़ द अमरीकन मेडिकल एसोसिएशन में छपी एक नई स्टडी बताती है कि सोशल मीडिया से थोड़े समय के लिए ब्रेक लेने से युवाओं की मेंटल हेल्थ में काफ़ी सुधार हो सकता है, लेकिन ज़रूरी नहीं कि इससे उनका स्क्रीन टाइम कम हो जाए।

इस नई स्टडी से पता चला है कि सिर्फ़ एक हफ़्ते के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल कम करने से युवाओं में डिप्रेशन, एंग्जायटी और नींद की दिक्कतें काफी कम हो जाती हैं।
स्टडी में 18 से 24 साल के 373 पार्टिसिपेंट्स को एक हफ़्ते तक सोशल मीडिया के बेसलाइन इस्तेमाल के दौरान फ़ॉलो किया गया, और फिर उन 295 पार्टिसिपेंट्स को ट्रैक किया गया जिन्होंने “सोशल मीडिया डिटॉक्स” वाला हफ़्ता चुना था।
डिटॉक्स के दौरान, स्टडी में शामिल युवाओं ने TikTok, X, Instagram, Snapchat और Facebook का इस्तेमाल करना बंद कर दिया। रिसर्चर्स ने खुद बताए गए स्क्रीन टाइम पर निर्भर रहने से बचने के लिए पैसिव स्मार्टफ़ोन ट्रैकिंग, डिजिटल फ़ेनोटाइपिंग और मेंटल हेल्थ सर्वे का इस्तेमाल किया।
नतीजों के मुताबिक, पार्टिसिपेंट्स में एंग्जायटी के लक्षणों में 16.1 प्रतिशत की कमी, डिप्रेशन में 24.8 प्रतिशत की कमी और नींद न आने या नींद की दिक्कतों में 14.5 प्रतिशत की कमी देखी गई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सबसे ज़्यादा सुधार उन युवाओं में देखा गया जो पहले से ही गंभीर डिप्रेशन से जूझ रहे थे, लेकिन अकेलेपन की भावना में कोई खास बदलाव नहीं आया।
रिसर्च के को-ऑथर हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के डॉ. जॉन टोरेस ने कहा कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल कम करना निश्चित रूप से फायदेमंद है, लेकिन यह अभी भी प्रोफेशनल मेडिकल मदद का विकल्प नहीं है। आगे उन्होंने कहा कि यह देखना फायदेमंद होगा कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल कम करने से आपकी सेहत में सुधार होता है या नहीं।
अमरीकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन के मिच प्रिंसटन के अनुसार, सोशल मीडिया से ब्रेक लेना एक आसान और मुफ़्त उपाय है जो मेंटल हेल्थ को बेहतर बना सकता है। रिपोर्ट में साफ़ किया गया है कि स्टडी रैंडम नहीं थी, बल्कि पार्टिसिपेंट्स ने अपनी मर्ज़ी से हिस्सा लिया था, जिससे नतीजों पर असर पड़ सकता था।
