क़दम कमज़ोर, पर पा ही ली मंज़िल

कहते हैं ‘जहाँ चाह वहाँ राह’.

कुछ ऐसा ही कर दिखाया है मुंबई में रहने वाले 21 साल के यश अवधेश गांधी ने. ज़िंदगी की मुश्किल चुनौतियों का सामना करते हुए यश आईआईएमलखनऊ तक पहुंच गए हैं जहां पहुंचना बहुतेरे छात्रों का सपना होता है.

यश की कहानी इसलिए प्रेरणादायक है क्योंकि वे सेरेब्रल पॉल्सी और डिस्लेक्सिया जैसी बेहद गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं. लड़खड़ा कर चल पाते हैं लेकिन हौसले को लेकर उनके क़दम नहीं लड़खड़ाए.

मुश्किलों के बाद भी यश ने मैनेजमेंट की प्रवेश परीक्षा कैट की तैयारी की और 92.5 अंक लाकर न केवल अपने माता पिता का नाम रोशन किया बल्कि कई युवाओं के लिए मिसाल बन गए. यहां भी ध्यान देने की वाली बात है कि उन्हें लिखित परीक्षा देने के लिए एक राइटर की ज़रूरत होती है, वह ख़ुद अपना पेपर नहीं लिख सकते.

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