सेहत के जानकारों का कहना है कि मानसिक कमजोरी और भूलने की बीमारी को खुद से दूर रखने के लिए तंबाकू और नमक का इस्तेमाल छोड़ना बहुत मददगार हो सकता है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, डिमेंशिया यानी मानसिक कमजोरी और भूलने की समस्या से बचने के लिए बताए गए तरीके अपनाकर ब्लड प्रेशर को नॉर्मल रखा जा सकता है और ब्लड शुगर लेवल को स्टेबल रखा जा सकता है।
इस बारे में, यूनाइटेड स्टेट्स में हुई एक नई स्टडी से पता चला है कि अगर कोई व्यक्ति अधेड़ उम्र में इन तीन हेल्दी आदतों को अपनाता है, यानी ब्लड प्रेशर को नॉर्मल रखना, ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करना और स्मोकिंग से बचता है तो डिमेंशिया से अपने आपको एक दशक से ज़्यादा समय तक बचने में कामयाब हो सकता है।
‘न्यूरोलॉजी ओपन एक्सेस’ में प्रकाशित इस नई रिसर्च के अनुसार है, लैंगोन हेल्थ के रिसर्चर्स ने पाया कि 46 से 70 साल की उम्र के बीच मिडलाइफ़ जोखिम वाले कारकों से बचने से डिमेंशिया की संभावित शुरुआत को टालने में मदद मिल सकती है।
स्टडी के दौरान रिसर्चर्स ने ‘एथेरोस्क्लेरोसिस रिस्क इन कम्युनिटीज़’ (ARIC) स्टडी के डेटा का एनालिसिस किया। यह एक कोहोर्ट स्टडी थी जो 1987 में शुरू हुई थी। उन्होंने 12,409 लोगों के डेटा की जांच की। इस जाँच में तीन रिस्क फ़ैक्टर का आकलन किया गया जिन्हें ARIC स्टडी में लगातार मापा गया था-
हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन)
स्मोकिंग
डायबिटीज।
लोगों को औसतन 26.3 साल तक फ़ॉलो किया गया। उस समय के दौरान-
3,008 लोगों को डिमेंशिया हुआ
5,238 लोगों की मौत डिमेंशिया हुए बिना हो गई।
जिन लोगों में डिमेंशिया का कोई रिस्क फ़ैक्टर नहीं था, उनमें इस बीमारी का रिस्क सबसे कम था। इसके उलट, जिन लोगों में तीनों रिस्क फ़ैक्टर थे, उनमें डिमेंशिया होने की संभावना 2.69 गुना ज़्यादा थी।
न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने यह भी पता लगाया है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में डिमेंशिया उनके रिस्क फैक्टर्स की परवाह किए बिना, काफी देर से दिखता है।
यूके में अभी 9 लाख से ज़्यादा की संख्या में लोग डिमेंशिया के साथ जी रहे हैं। यह बीमारी देश में मौत के मुख्य कारणों में से एक है, जिससे हर साल 74 हज़ार से ज़्यादा लोग मर जाते हैं।
डिमेंशिया के ज़्यादातर मामले 65 साल से ज़्यादा उम्र के लोगों में होते हैं और 65 साल की उम्र के बाद हर पाँच साल में इस बीमारी का खतरा दोगुना हो जाता है। हालाँकि साइंटिफिक रिसर्च से पता चल रहा है कि ज़रूरी नहीं कि डिमेंशिया उम्र बढ़ने का ही हिस्सा हो और इसे काफी हद तक रोका जा सकता है।
हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने से जैसे रेगुलर एक्सरसाइज़ करना, बैलेंस्ड डाइट लेना और हेल्दी वज़न बनाए रखना, डिमेंशिया के खतरे को 45% से ज़्यादा कम किया जा सकता है।
अब न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी लैंगोन हेल्थ के साइंटिस्ट्स की नई रिसर्च से यह भी पता चला है कि अगर लोग अधेड़ उम्र में भी हेल्थ के प्रति सचेत रहते हैं, तो वे इस बीमारी के शुरू होने में दस साल से ज़्यादा की देरी कर सकते हैं।
बताते चलें कि डिमेंशिया के कारण याददाश्त कम होना, कन्फ्यूजन और बातचीत में दिक्कत जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। अल्जाइमर रोग, जो डिमेंशिया का सबसे आम प्रकार है, आमतौर पर 65 साल की उम्र के बाद होता है।