एक हालिया अध्ययन में पाया गया है कि बच्चों और युवा छात्रों में अनावश्यक स्क्रीन टाइम का हर अतिरिक्त घंटा उनके हृदय और जठरांत्र संबंधी स्वास्थ्य (heart and gastrointestinal health) के लिए खतरनाक हो सकता है, खासकर जब उनकी नींद भी प्रभावित होती है।

यह अध्ययन अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के जर्नल में प्रकाशित हुआ था। इस अध्ययन में दो बड़े डेनिश समूहों से स्वयंसेवी जानकारी एकत्र की गई। अध्ययन के लिए एक हज़ार से अधिक माँ-बच्चे के जोड़े शामिल किए गए थे। अध्ययन के दौरान नोट किया जाने वाला स्क्रीन टाइम माता-पिता या बच्चे की रिपोर्टिंग पर आधारित था, जबकि नींद और शारीरिक गतिविधि की निगरानी आधुनिक उपकरणों का उपयोग करके की गई थी।
अमरीकन हार्ट एसोसिएशन के जर्नल में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बच्चों और किशोरों के बीच समवर्ती कार्डियोमेटाबोलिक स्वास्थ्य पर स्क्रीन समय के प्रभावों को उजागर करने के लिए एक अध्ययन किया। अध्ययन से पता चला कि बढ़ता स्क्रीन समय उच्च कार्डियोमेटाबोलिक जोखिम से जुड़ा है। उन्होंने इसे आज के समाज की बेहद चिंताजनक प्रवृत्ति बताया।
अध्ययन के अनुसार, स्क्रीन टाइम के प्रत्येक अतिरिक्त घंटे से बच्चों (6 से 10 वर्ष) में कार्डियोमेटाबोलिक जोखिम लगभग 0.08 अंक और किशोरों (18 वर्ष) में 0.13 अंक बढ़ गया। यह जोखिम उन बच्चों में अधिक स्पष्ट था जो कम सोते थे या देर रात तक जागते थे। शोधकर्ताओं ने रक्त में 37 बायोमार्करों का एक विशिष्ट ‘स्क्रीन टाइम फ़िंगरप्रिंट’ भी खोजा जो मेटाबोलिक परिवर्तनों का संकेत देते हैं।
अगले दस वर्षों में किशोरों में हृदय रोग का खतरा भी बढ़ गया है। हालाँकि यह अध्ययन यूरोप में किया गया था, लेकिन इसके निष्कर्ष दुनिया भर में लागू होते हैं।
ऑनलाइनक्लासेस, मोबाइल फ़ोन और गेमिंग के बढ़ते चलन के कारण पूरी दुनिया में ही में बच्चों का स्क्रीन टाइम तेज़ी से बढ़ रहा है। इसके साथ ही, नींद की कमी, मोटापा और डायबिटीज़ जैसी समस्याएँ भी आम होती जा रही हैं।
के हवाले से बच्चों के हृदय की सुरक्षा के के संदर्भ में चिंता जताते हुए विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि बच्चों के माता-पिता उनके स्क्रीन टाइम की एक दैनिक सीमा निर्धारित करें। शोधकर्ता कहते हैं कि बच्चों को स्कूल के बाद केवल दो घंटे या उससे कम समय के लिए ही मोबाइल फ़ोन का उपयोग करना चाहिए। साथ ही वे सलाह देते हैं कि-
- स्क्रीन-मुक्त क्षेत्र बनाएँ, बच्चों को खाने की मेज पर व्यस्त रखें और सोने से एक घंटे पहले स्क्रीन से दूर रखें।
- नींद को प्राथमिकता दें, बच्चों के लिए एक नियमित सोने का समय निर्धारित करें और बेडरूम में मोबाइल फ़ोन या टीवी न रखें।
- शारीरिक गतिविधि बढ़ाएँ, बाहर खेलना, रस्सी कूदना या घर पर विभिन्न व्यायाम जैसी गतिविधियों को नियमित दिनचर्या बनाएँ।
- माता-पिता को खुद एक उदाहरण स्थापित करना चाहिए, बच्चों के सामने फ़ोन का कम इस्तेमाल करना चाहिए और परिवार को समय देना चाहिए।
इतना ही नहीं, विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि आपको बच्चों पर सिर्फ़ पाबंदियाँ नहीं लगानी चाहिए, बल्कि उन्हें सरल भाषा में समझाना चाहिए और हर विषय पर खुलकर बात करनी चाहिए।
