विश्व दूरसंचार दिवस: बदले भारत की तस्वीर का एक डिजिटल रुख प्रस्तुत करता है

आज का इंसान एक विशाल डिजिटल नेटवर्क का सक्रिय हिस्सा है। इसी ऐतिहासिक और तकनीकी परिवर्तन के वैश्विक महत्व को याद रखने के लिए हर साल 17 मई को ‘विश्व दूरसंचार एवं सूचना समाज दिवस’ मनाया जाता है।

यह दिवस केवल तकनीकी उपलब्धियों का उत्सव नहीं, बल्कि उस वैश्विक परिवर्तन का प्रतीक है जिसने पृथ्वी को ‘वैश्विक ग्राम’ से आगे बढ़ाकर ‘डिजिटल सभ्यता’ में रूपांतरित कर दिया है। ‘विश्व दूरसंचार एवं सूचना समाज दिवस’ 2026 की थीम के अनुरूप चर्चाओं, कार्यशालाओं या प्रदर्शनियों की मेजबानी करें और अपने कार्यक्रम को वैश्विक कैलेंडर में जमा करें ।

समय और दूरी की पारंपरिक सीमाओं को इंटरनेट और मोबाइल तकनीक ने लगभग समाप्त कर दिया है। शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार, प्रशासन, राजनीति, संस्कृति और मनोरंजन जीवन का कोई क्षेत्र ऐसा नहीं बचा है जो दूरसंचार तकनीक से प्रभावित न हुआ हो।

17 मई 1865 से विश्व दूरसंचार दिवस का इतिहास शुरू होता है। यह उस समय की बात है जब पेरिस में ‘अंतरराष्ट्रीय टेलीग्राफ संघ’ (International Telegraph Union) की स्थापना हुई। उस समय टेलीग्राफ आधुनिक संचार का सबसे तेज माध्यम था और विभिन्न देशों के बीच संदेशों के आदान-प्रदान हेतु एक अंतरराष्ट्रीय समन्वय की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इसी उद्देश्य से इस संगठन की स्थापना की गई।

बाद में यही संस्था ‘अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ’ के रूप में विकसित हुई। 1947 में आईटीयू संयुक्त राष्ट्र की विशेष एजेंसी बन गई। यह विश्व की सबसे पुरानी अंतरराष्ट्रीय तकनीकी संस्थाओं में से एक है। वैश्विक संचार व्यवस्था को व्यवस्थित और समन्वित बनाने में इसकी ऐतिहासिक भूमिका रही है।

भारत की बात करें तो यहाँ दूरसंचार का प्रारंभ औपनिवेशिक काल में टेलीग्राफ प्रणाली से हुआ। ब्रिटिश शासन द्वारा प्रशासनिक नियंत्रण और सैन्य उद्देश्यों के लिए संचार नेटवर्क का विस्तार किया गया।

दूरभाष सेवाओं का विस्तार वैसे तो स्वतंत्रता के बाद आरंभ हुआ मगर लंबे समय तक यह सुविधा केवल सीमित वर्ग तक ही उपलब्ध रही। फिर एक समय ऐसा भी आया जब टेलीफोन कनेक्शन लेने के लिए वर्षों तक प्रतीक्षा करनी पड़ती थी।

शुरुआत में दूरसंचार सेवाएं महंगी और सीमित थीं मगर 1991 के आर्थिक उदारीकरण के बाद भारतीय दूरसंचार क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया। निजी कंपनियों के प्रवेश, प्रतिस्पर्धा और तकनीकी नवाचार ने भारत में मोबाइल क्रांति को जन्म दिया। जल्द ही मोबाइल फोन आम इंसान तक पहुंचा। साथ ही कॉल दरों में कमी और इंटरनेट सेवाओं के विस्तार के साथ भारत दुनिया के सबसे बड़े दूरसंचार बाजारों में एक बन सका।

मौजूदा समय की बात करें तो आज भारत विश्व के सबसे बड़े मोबाइल और इंटरनेट उपभोक्ता देशों में है। ‘डिजिटल इंडिया’, ‘भारतनेट’ और ‘5G मिशन’ जैसी योजनाओं ने डिजिटल स्ट्रक्चर को मज़बूत करने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों तक भी डिजिटल सेवाओं का ज़बरदस्त विस्तार किया है।

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