बीते दस दिनों में चौथी बार पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की गई। कीमतों में इस बढ़ोतरी से आम लोगों के अलावा सभी सेक्टर में अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है। कीमतों में बढ़ोतरी से पहले दिल्ली में पेट्रोल 99.51 रुपए प्रति लीटर और डीजल 92.49 रुपए प्रति लीटर बिक रहा था। दाम बढ़ने के बाद अब राजधानी में पेट्रोल 102.12 रुपए प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपए प्रति लीटर हो गया है।
इस बढ़ोत्तरी पर विरुधुनगर से कांग्रेस सांसद मणिक्कम टैगोर ने सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी जनता के लिए नहीं बल्कि आईओसी के बोर्डरूम और अंबानी की रिफाइनरियों के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने मौजूदा स्थिति को ‘ऑयल क्राइसिस’ नहीं बल्कि ‘कॉरपोरेट प्रोटेक्शन रैकेट’ बताया है।
याद दिला दें कि इससे पहले, 23 मई को कीमतों में इज़ाफ़ा करते हुए सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल की कीमतें 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल की कीमतें 91 पैसे प्रति लीटर बढ़ाई थी।
सरकारी तेल कंपनियों ने 15 मई को ही पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण बढ़ी हुई ऊर्जा कीमतों का बोझ धीरे-धीरे ग्राहकों पर डालना शुरू किया था। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में हो रहे इज़ाफ़े के बीच पिछले दस दिन में ईंधन की दरों में यह चौथी बढ़ोतरी है।
पेट्रोल की बढ़ती कीमतों और केंद्र सरकार की तेल नीति को लेकर विरुधुनगर से कांग्रेस सांसद मणिक्कम टैगोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट के माध्यम से आरोप लगाया कि सरकार आम जनता के बजाय तेल कंपनियों और कॉरपोरेट घरानों के हित में काम कर रही है।
इस पोस्ट में मणिक्कम टैगोर ने 2014, 2016 और 2026 के क्रूड ऑयल यानी कच्चे तेल और पेट्रोल कीमतों की है। उनका कहना है कि 2014 में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत 114 डॉलर प्रति बैरल थी, तब पेट्रोल 72 रुपये प्रति लीटर बिक रहा था। वहीं 2016 में क्रूड ऑयल घटकर 27 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया, तो पेट्रोल की कीमत 64 रुपये प्रति लीटर रही। आगे वह लिखते हैं कि 2026 में क्रूड ऑयल 97 डॉलर प्रति बैरल होने के बावजूद पेट्रोल 103 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है।
कांग्रेस सांसद मणिक्कम टैगोर का कहना है कि जब 2016 में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई थी, तब केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में 11 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की और उसे स्थायी रूप से जारी रखा। उन्होंने यह भी कहा कि जब तेल कंपनियों ने 7 दिनों तक मुनाफ़ा कमाया तो 7 घंटों में ही क़ीमतें बढ़ा दीं और जब जनता को 7 महीनों तक नुकसान उठाना पड़ा तो सरकार चुप्प है।