क्या है ‘मेडे’ कॉल ? विमानन में कब दी जाती है आधुनिक आपातकालीन कॉल ?

गुजरात के अहमदाबाद में एयर इंडिया यात्री विमान दुर्घटनाग्रस्त होने से उसमें सवार 242 में से 241 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। विमान बीजे मेडिकल कॉलेज के निकट एक हॉस्टल परिसर में जा गिरा। यहाँ भी बड़ी संख्या में डॉक्टर हताहत हुए हैं। हादसे में कुल 266 लोगों की मौत हो गई। हादसे की जांच विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो करेगा।

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इनमें 169 भारतीय नागरिक, 53 ब्रिटिश नागरिक और एक कनाडाई नागरिक के अलावा 7 पुर्तगाली नागरिक सवार थे। इसे भारतीय इतिहास की सबसे बड़े विमानन दुर्घटनाओं में से एक माना जा रहा है।

इस दुर्भाग्यपूर्ण उड़ान में 230 यात्री, 10 केबिन क्रू और दो पायलट सवार थे। अधिकारियों के अनुसार, 11Aसीट पर बैठने वाले भारतीय मूल के ब्रिटिश नागरिक विश्वास कुमार इस हादसे में बच गए है और वर्तमान में एक स्थानीय अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है। विमान में सवार गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की भी मौत हो गई।

डीजी सिविल एविएशन द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक़, विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से पहले कैप्टन ने 1:39 बजे ‘मेडे’ कॉल किया था।

भारतीय अधिकारियों के अनुसार, दुर्भाग्यपूर्ण विमान के पायलट ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल को मेडे कॉल किया था, लेकिन विमान ने उसके बाद एटीसी द्वारा की गई कॉल का जवाब नहीं दिया।

‘मेडे’ कॉल
‘मेडे’ कॉल का क्या मतलब है और पायलट यह कॉल कब करता है? विमानन शब्दावली में मेडे कॉल एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त संकट कॉल है। ‘मेडे’ कॉल का इस्तेमाल ज्यादातर एविएशन सेक्टर में पायलटों द्वारा आपातकालीन स्थिति में किया जाता है।

यूएस फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (एफएए) के अनुसार, जब संकट कॉल यानी आपातकालीन स्थिति के दौरान सिग्नल कमजोर हो जाता है, जब अन्य चीजें स्पष्ट रूप से समझ में नहीं आ रही होती हैं, तो इस दौरान ‘मेडे’ शब्द का इस्तेमाल किया जाता है।

अमरीकी सरकार की फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक़ मेडे एक डिस्ट्रेस कॉल है जो तनाव के समय लगाई जाने वाली मदद की गुहार है। ये अंतरराष्ट्रीय तौर पर मान्य एक रेडियो सिग्नल है।

‘मेडे’ की शुरुआत 1923 में ‘अंतरराष्ट्रीय संकट कॉल’ के रूप में हुई थी, जिसे 1948 में आधिकारिक दर्जा मिला। अंग्रेजी शब्दकोश मेरियम-वेबस्टर के अनुसार, उस समय अधिकांश हवाई यातायात ब्रिटेन और फ्रांस के बीच था, इसलिए दोनों देशों के अधिकारियों ने आपातकालीन स्थिति के बारे में सूचित करने के लिए एक ऐसा सिग्नल प्रस्तावित करने के बारे में सोचा, जिसे अंग्रेजी और फ्रेंच दोनों ही भाषी समझ सकें।

‘मेडे’ का मतलब मदद के लिए पुकारना है और इस कॉल की किये जाने का अर्थ है ‘मदद करो’। इसी वजह से ‘मेडे’ शब्द लंदन के कोवेंट्री एयरपोर्ट पर तैनात एक वरिष्ठ रेडियो अधिकारी फ्रेडरिक मैकफोर्ड द्वारा गढ़ा गया था, जो एक फ्रेंच शब्द है।

बचाव कार्य में लगे अधिकारियों ने बृहस्पतिवार देर रात बताया कि घटनास्थल पर तापमान बढ़ जाने से जानवरों और पक्षियों को भी भागने का मौका नहीं मिला और सभी जलकर खाक हो गए। जानकारी के मुताबिक़, विस्फोट के बाद दुर्घटनाग्रस्त विमान के आसपास तापमान 1000 डिग्री सेल्सियस पहुंच जाने के कारण बचाव कार्य में काफी मुश्किलें आईं।

घटनास्थल पर 1000 डिग्री हुआ तापमान
उड़ान के समय विमान की ऊंचाई 625 फीट थी। हादसे के समय विमान में 1,26,907 लीटर ईंधन था। विमान क्रैश होते ही ईंधन ने आग पकड़ ली। तेज धमाके से उसके परखच्चे उड़ गए, विमान ज्वालामुखी की तरह धधक उठा। घने काले धुएं का गुबार काफी दूर तक देखा गया।

शवों की पहचान डीएनए के आधार पर किये जाने के बाद उनके परिजनों को सौंपा जाएगा।

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