युद्ध ने ग़ाज़ा में मानव विकास को 77 साल पीछे धकेल दिया

संयुक्त राष्ट्र सहित योरोपीय संघ और विश्व बैंक के एक नए आकलन में आगाह किया गया है कि युद्ध ने ग़ाज़ा में मानव विकास को 77 वर्ष पीछे धकेल दिया है। यहाँ अगले एक दशक के दौरान पुनर्बहाली और पुनर्निर्माण आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए लगभग 71 अरब डॉलर की आवश्यकता होगी।

ग़ाज़ा में इसराइली सैन्य बलों और हमास के बीच हिंसक टकराव से बड़े पैमाने पर तबाही हुई और एक विकराल मानवीय संकट उपजा। यूएन और साझेदार संगठनों ने ग़ाज़ा में 24 महीनों के टकराव के दौरान हुई क्षति और आवश्यकताओं की समीक्षा पर केन्द्रित अपना यह आकलन सोमवार को जारी किया है।

रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि इस युद्ध ने ग़ाज़ा में मानव विकास को 77 वर्ष पीछे धकेल दिया है, और महिलाएँ, बच्चे व अन्य निर्बल समूह इसका सबसे अधिक ख़ामियाज़ा भुगत रहे हैं।

आकलन के अनुसार, हिंसक टकराव में भौतिक आधारभूत ढाँचे को पहुँची क्षति की कुल क़ीमत 35.2 अरब डॉलर आंकी गई है, जबकि 22 अरब डॉलर से अधिक का आर्थिक व सामाजिक नुक़सान हुआ है। इससे अंदाज़ा लगाया गया है कि पहले 18 महीनों में, अति-आवश्यक सेवाओं को बहाल करने, महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचों को फिर से खड़ा करने और आर्थिक गतिविधियों को सहारा देने के लिए 26.3 अरब डॉलर की ज़रूरत होगी।

युद्ध की वजह से ग़ाज़ा की अर्थव्यवस्था 84 प्रतिशत तक सिकुड़ चुकी है। यहाँ 3.71 लाख से अधिक घर ध्वस्त या क्षतिग्रस्त हुए हैं। लगभग सभी स्कूलों पर असर हुआ है और 50 प्रतिशत से अधिक अस्पतालों में स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं का संचालन नहीं हो पा रहा है।

इस आकलन के अनुसार, 60 प्रतिशत से अधिक लोगों ने अपना घर खो दिया है। करीब 19 लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए। यहाँ रहने वाले अनेक फ़लस्तीनियों को बार-बार विस्थापन का दंश झेलना पड़ा है।

ग़ाज़ा में स्थानीय प्रशासन ने बताया कि हिंसा में 71 हज़ार से अधिक फ़लस्तीनियों की जान गई और 1.71 लाख घायल हुए। अनेक के अब भी इमारतों के मलबे में दबे होने की आशंका है।

आकलन में कहा गया है कि ग़ाज़ा में युद्धविराम का पालन और पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था, पुनर्निर्माण और पुनर्बहाली प्रक्रिया के लिए न्यूनतम शर्त हैं। साथ ही, बेरोकटोक मानवीय सहायता पहुँचाने के लिए व्यवस्था, लोगों, सामान और पुनर्निर्माण के लिए ज़रूरी सामग्री की आवाजाही और अति-आवश्यक सेवाओं की बहाली भी अहम है।

योरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र की अनुशंसा है कि पुनर्निर्माण और पुनर्बहाली प्रयासों को फ़लस्तीनियों की अगुवाई में किया जाए, फ़लस्तीनी प्राधिकरण की शासन व्यवस्था को समर्थन देने के लिए क़दम उठाए जाएं, और दो-राष्ट्र समाधान पर आधारित राजनैतिक हल को बढ़ावा मिले।

आकलन के अनुसार, पुनर्निर्माण योजना और उसे अमल में लाने की प्रक्रिया को समावेशी, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना होगा, और महिलाओं, बच्चों, वृद्धजन व विकलांगजन की आवश्यकताओं पर विशेष रूप से ध्यान देना होगा।

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