एक जहरीला 8 इंच का कनखजूरा किसी के लिए बुरे सपने का विषय हो सकता है, लेकिन यह गुर्दे की बीमारी से प्रभावित लोगों की जान बचा सकता है। 
बीजिंग में होने वाले एक हालिया अध्ययन में पाया गया है कि कनखजूरे का जहर गुर्दे की बीमारियों के प्रभावी उपचार में मदद कर सकता है।
किडनी की बीमारी दुनिया के कई क्षेत्रों में मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है, जिससे हर साल लाखों अपनी ज़िंदगी से हाथ धो देते हैं।
चिकित्सा क्षेत्र के स्वास्थ्य विशेषज्ञों और अधिकारियों ने अब क्रोनिक किडनी रोग को रोकने या इलाज करने का एक बेहद ख़ास तरीका खोजा है। पारंपरिक चीनी चिकित्सा में इस्तेमाल होने वाले सेंटीपीड यानी कनखजूरे किडनी के इलाज के लिए बेहद कारगर साबित हुए हैं
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन में वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक हालिया अध्ययन से पता चला है कि ‘चाइनीज रेड-हेडेड सेंटीपीड’ के नाम से जाना जाने वाला जहरीला कनखजूरा किडनी की बीमारी के इलाज में मदद कर सकता है और जान बचाने में मददगार साबित होता है।
जर्नल ऑफ नेचुरल प्रोडक्ट्स में प्रकाशित एक अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने पाया कि कनखजूरे में एल्कलॉइड नामक विशेष रसायन होते हैं जो बीमारी से लड़ते हैं।
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पारंपरिक चीनी चिकित्सा में जानवरों की लगभग 1,500 प्रजातियों का उपयोग किया जाता है। मिर्गी, तपेदिक, जलन और हृदय रोग सहित स्थितियों के उपचार में हजारों वर्षों से जहरीले कनखजूरे का उपयोग किया जाता रहा है।
शोधकर्ताओं ने कहा कि इसमें मौजूद एक जहरीला रासायनिक अल्कलॉइड गुर्दे में सूजन और घाव को कम कर सकता है। रेड-हेडेड सेंटीपीड’ में 12 नए अल्कलॉइड यौगिक होते हैं, जिनमें से कुछ में सूजन-रोधी और गुर्दे-रोधी फाइब्रोसिस गुण होते हैं।
ऐसे में वैज्ञानिक और हेल्थ एक्सपर्ट कनखजूरे के जहर को गुर्दे की बीमारियों के उपचार के लिए बेहद कारगर मानते हुए इस पर और भी ज़्यादा जानकारी पाने का प्रयास कर रहे हैं।
