संसद का विशेष सत्र गुरुवार से शुरू होने वाला है। आज से संसद के विस्तारित बजट सत्र का तीन दिवसीय विशेष शुरू हो रहा है। इस सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के कार्यान्वयन से जुड़े प्रस्तावित संवैधानिक संशोधनों पर चर्चा होगी। बिलों पर 16, 17 और 18 अप्रैल को चर्चा होगी। भाजपा, कांग्रेस सहित सभी दलों ने अपने सांसदों को संसद में मौजूद रहने का व्हिप भी जारी किया है।
हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को शीघ्र लागू करने के साथ-साथ संसद के निचले सदन में सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए संविधान में संशोधन करने वाले विधेयक को मंजूरी दी गई थी।
लोकसभा सांसदों की वर्तमान संख्या 543 है। संशोधन बिल में लोकसभा सांसदों की संख्या 850 करने का प्रस्ताव है। राज्यों में 815 और केंद्र शासित प्रदेशों में 35 तक सीटें होंगी। सीटों की सटीक संख्या तय करने के लिए परिसीमन भी किया जाएगा। इनमें 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ‘ऐतिहासिक कदम’ बताया है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, ‘आज से संसद के विशेष सत्र में हमारा देश महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। हमारी माताओं और बहनों का सम्मान ही राष्ट्र का सम्मान है, और इसी भावना के साथ हम इस दिशा में दृढ़ता से आगे बढ़ रहे हैं।’
उम्मीद है कि सरकार की तरफ से तीन संशोधन विधेयक पेश किया जा सकता है, जिनका उद्देश्य उस कानून को लागू करना है जिसे 2023 में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने के लिए पारित किया गया था।
बताते चलें कि केंद्र सरकार द्वारा सांसदों के साथ संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 या महिला आरक्षण विधेयक में प्रस्तावित संशोधन का पाठ इस सप्ताह की शुरुआत में साझा किया गया। जिसका उद्देश्य लोकसभा सीटों को बढ़ाकर 850 करना है, जिसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सदस्य भी शामिल हैं।
गौरतलब है कि अभी लोकसभा में राज्यों से 530 और केंद्र शासित प्रदेशों से 20 सदस्य हैं। हालांकि, परिसीमन आयोग ने यह संख्या 543 निर्धारित की थी। वहीँ विचाराधीन विधेयक में राज्यों के निर्वाचन क्षेत्रों से प्रत्यक्ष चुनाव द्वारा चुने जाने वाले सदस्यों की संख्या 815 तक सीमित करने का प्रस्ताव है।
बताते चलें कि केंद्र शासित प्रदेशों के लिए विधेयक में कहा गया है। केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने के लिए 35 से अधिक सदस्य नहीं होंगे, जिनका चुनाव संसद द्वारा विधिवत रूप से किया जाएगा।
इस विधेयक में प्रस्तावित एक अन्य महत्वपूर्ण संशोधन की बात करें तो यह जनसंख्या की परिभाषा से संबंधित है। इसमें संसद को यह तय करने का अधिकार है कि सीटों की संख्या में विस्तार के लिए किन आंकड़ों को आधार बनाया जाना है।
इसके साथ ही संशोधन विधेयक में अनुच्छेद 82 में भी परिवर्तन प्रस्तावित हैं, जिसमें प्रत्येक जनगणना के पूर्ण होने पर, सीटों का आवंटन के स्थान पर सीटों का आवंटन शब्द प्रतिस्थापित किया जाएगा। प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य कोटा के कार्यान्वयन को 2027 की जनगणना से अलग करना और इसके बजाय इसे 2011 की जनगणना पर आधारित करना है, जिससे 2029 के आम चुनावों से पहले इसे लागू किया जा सके।
बिलों को पास कराने के लिए सरकार को दो तिहाई बहुमत की जरूरत होगी। संसद से मंजूरी मिलने के बाद यह कानून 31 मार्च 2029 से लागू होगा, और उसी साल होने वाले लोकसभा चुनाव में पहली बार प्रभावी होगा।