टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले देशभर के लाखों शिक्षक आज टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ दिल्ली के रामलीला मैदान में हल्ला बोल प्रदर्शन कर रहे हैं। सितंबर 2025 में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले से देशभर के शिक्षकों में नाराजगी थी। इस फैसले के खिलाफ देश के अलग-अलग राज्यों में प्रदर्शन भी किए गए। शिक्षकों का ये प्रदर्शन अब राज्यों से बढ़ कर दिल्ली पहुंच चुका है।
विरोध कर रहे शिक्षक, सुप्रीम कोर्ट के पहली सितंबर 2025 के आदेश को अन्यायपूर्ण बताते हुए पुरानी नियुक्तियों को छूट देने की मांग कर रहे हैं। गौरतलब है कि इस आदेश से लगभग 20 लाख शिक्षकों की नौकरी पर खतरा है।
इसी विरोध के चलते आज यानी 4 अप्रैल को दिल्ली के रामलीला मैदान में देशभर के शिक्षक जमा हो रहे हैं। ये सभी शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए जमा हो रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहली सितंबर 2025 को टीईटी को अनिवार्य कर दिया गया था। ऐसे में शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता के विरोध देशभर में शिक्षकों का विरोध तेज होने के साथ इन लोगों ने अब राष्ट्रिय राजधानी का रुख किया है।
टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा शिक्षक पात्रता को अनिवार्य किए जाने के फैसले से देशभर के करीब 20 लाख शिक्षक प्रभावित हुए हैं। संगठन के मुताबिक, इस फैसले के कारण कई शिक्षकों की नौकरी पर खतरे को देखते हुए शिक्षकों में चिंता और नाराजगी बढ़ती जा रही है।
दिल्ली में आयोजित इस प्रदर्शन के ज़रिए फेडरेशन ऑफ इंडिया ने केंद्र सरकार के सामने भी अपनी मांगे रखी हैं। संगठन का कहना है कि सरकार एक नया कानून बनाकर सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के प्रभाव को खत्म करे। फेडरेशन का कहना है कि यदि केंद्र सरकार ऐसा कदम उठाती है तो इससे देशभर के करीब 20 लाख शिक्षकों को राहत और न्याय मिल सकेगा।
याद दिला दें कि सुप्रीम कोर्ट ने उस समय एक अहम फैसला सुनाते टीईटी परीक्षा को अनिवार्य कर दिया था। शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून के तहत इस नियम को देशभर के शिक्षकों पर लागू किया गया था। कोर्ट के आदेश में कहा गया था कि सभी शिक्षकों को तय समय सीमा के भीतर टीईटी पास करना जरूरी है।
कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि यदि कोई शिक्षक दो साल के अंदर यानी पहली सितंबर 2027 तक यह परीक्षा पास नहीं करता, तो उसे हर साल मिलने वाली अतिरिक्त वेतन वृद्धि से वंचित कर दिया जाएगा। इसके अलावा नियमों का पालन न करने पर उसकी नौकरी भी खतरे में पड़ सकती है। हालांकि ऐसे शिक्षक जिनकी 5 साल से कम की सेवाबची है, उन्हें इससे छूट दी गई है, लेकिन उन्हें भी प्रमोशन से वंचित रखा गया है।