तन के साथ मन की सेहत का भी रखें ख्याल

हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि खुशहाल, बेहतर और लंबे जीवन के लिए जितना जितनी ज़रूरी शारीरिक सेहत है ठीक उतनी आवश्यक न नज़र आने वाली दिमाग़ी सेहत भी। क्योंकि अकसर मानसिक विकार नज़र नहीं आते जबकि इनकी अनदेखी जीवन को कई समस्याओं में घेरने के साथ दर्दनाक भी बना देते हैं।

तन के साथ मन की सेहत का भी रखें ख्याल

पूरी दुनिया की एक न्यूरोलॉजी संस्था है जिसे ‘वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ न्यूरोलॉजी’ कहा जाता है। इस फेडरेशन की सदस्यता 60 से अधिक देशों ने ले रखी है।

हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, शरीर के साथ-साथ मन के स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना बहुत जरूरी है। यदि समय रहते मानसिक रोगों का निदान किया जाए तो उपचार की सफलता दर बढ़ जाती है और बाद में होने वाली समस्याएं को भी नियंत्रित किया जा सकता है।

चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि हर मानसिक बीमारी का इलाज संभव है अगर इसका शीघ्र निदान किया जाए और इसका सफलतापूर्वक इलाज किया जा सके। इलाज में देरी से बीमारी जटिल हो जाती है और ठीक होने की संभावना कम हो जाती है।

आंकड़े बताते हैं कि दुनिया भर में हर साल 6 से 7 प्रतिशत लोग न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से पीड़ित होते हैं, जबकि महिलाओं में सिरदर्द, स्ट्रोक और मिर्गी की दर पुरुषों की तुलना में अधिक है।

जानकारों का कहना है कि ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि हम एक आरामदायक जीवन जीने के आदि हो गए हैं, बेहतर जीवन जीने के लिए हमें 24 घंटों को 3 भागों में विभाजित करना चाहिए, 8 घंटे काम करना चाहिए, 8 घंटे लोगों से मिलना, पढ़ना व्यायाम सहित अन्य गतिविधियों में बिताना चाहिए। शेष 8 घंटे आराम के लिए ज़रूरी हैं।

अगर हम मानसिक बीमारी को कम करना चाहते हैं तो हमें एक बेहतर समाज बनाने और मानसिक बीमारी की दर को कम करने के लिए अपनी जीवनशैली में बदलाव करना होगा।

जमा किये गए आंकड़े बताते हैं की दुनिया भर में सबसे आम मानसिक बीमारी सिरदर्द और माइग्रेन देखने में आती है। इसके बाद में फालिज की दर सबसे अधिक है।

अस्पतालों में उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, हर साल फालिज के स्ट्रोक से 3.5 से 4 लाख लोगों की मौत हो जाती है, जिनमें अधिकतर युवा होते हैं।

आंकड़े बताते हैं कि दुनिया भर में हर साल 6 से 7 प्रतिशत लोग न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से पीड़ित होते हैं, जबकि महिलाओं में सिरदर्द, स्ट्रोक और मिर्गी की दर पुरुषों की तुलना में अधिक है।

महिलाओं में मानसिक समस्याओं की उच्च दर का मुख्य कारण गर्भावस्था के दौरान समस्याएं, उच्च रक्तचाप और तनाव स्तर हैं।

एक अध्ययन के अनुसार पर्यावरण प्रदूषण, अनुचित व्यवहार, घरेलू विफलताएं और उपेक्षा अवसाद और चिंता आदि भी मानसिक रोगों में वृद्धि का बड़ा कारण हैं।

चिकित्सा विशेषज्ञ इस बात से सहमत हैं कि कुछ लोग मानसिक बीमारी के परिणामस्वरूप अवसाद से पीड़ित होते हैं और डॉक्टर के लिए रोगी का इलाज करना मुश्किल हो जाता है क्योंकि थेरेपी या दवा ठीक से काम नहीं करती है। उदाहरण के लिए, कुछ लोग स्ट्रोक के बाद विकलांग हो जाते हैं और अवसाद से पीड़ित हो जाते हैं।

एक्सपर्ट कहते हैं कि हमारी जीवनशैली मानसिक रोगों को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है। लोगों से संवाद न करना लोगों को मानसिक रूप से बीमार बना रहा है लेकिन दुर्भाग्य से हम इन चीजों को नजरअंदाज कर रहे हैं जबकि हम जानते हैं कि ये चीजें हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए कितनी हानिकारक हैं। इन लापरवाहियों के चलते लोगों में सर्वाइकल, आंख और जोड़ों की समस्या आम हो गई है।

डब्लूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक़ मानसिक विकारों की बढ़ती संख्या को देखते हुए हर साल 22 जुलाई को ‘वर्ल्ड ब्रेन डे’ मनाया जाता है।

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