सुनीता विलियम्स की तीसरी अंतरिक्ष उड़ान तकनीकी कारणों से टली

भारतीय मूल की अमरीकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स आज बतौर पायलट तीसरी बार अंतरिक्ष की उड़ान भरने वाली थीं। सुनीता नए ह्यूमन-रेटेड अंतरिक्ष यान के पहले मिशन पर उड़ान भरने के साथ पहली महिला होने का इतिहास रचने वाली थीं।

सुनीता विलियम्स की तीसरी अंतरिक्ष उड़ान तकनीकी कारणों से टली

यह उड़ान यूनाइटेड लॉन्च अलायंस एटलस वी रॉकेट से आज यानी 7 मई सुबह 8.04 बजे फ्लोरिडा के केप कैनावेरल स्पेस फोर्स स्टेशन के स्पेस कॉम्प्लेक्स -41 से होनी थी। किसी तकनीकी समस्या के चलते लॉन्च से कुछ घंटे पहले इस मिशन को अगली सूचना तक के लिए टाल दिया गया है।

58 वर्षीय सुनीता विलियम्स बोइंग के स्टारलाइनर अंतरिक्ष यान से अपना ये सफर शुरू करने वाली थीं। सुनीता विलियम्स के साथ बुच विलमोर स्टारलाइनर से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र तक का सफर करने वाले थे। इसे संकटग्रस्त बोइंग कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण और बहु-प्रतीक्षित कामयाबी बताया गया था।

अंतरिक्ष यान स्टारलाइनर की रवानगी मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय समयानुसार 8:04 बजे की निर्धारित की गई थी। अंतर्राष्ट्रीय मीडिया के हवाले से सुनीता विलियम्स ने इस प्रोजेक्ट पर जाने में ख़ुशी और गौरवान्वित होने की बात कही थी।

इस कूच के साथ सुनीता तीसरी बार अंतरिक्ष में उड़ान भरने वाली थीं। इससे पहले वर्ष 2006 में उन्होंने पहली यात्रा की थी। उनकी दूसरी यात्रा 2012 में हुई। नासा के हवाले से सुनीता अंतरिक्ष में कुल 322 दिन बिता चुकी हैं।

गौरतलब है कि भारतीय-अमरीकी न्यूरोएनाटॉमिस्ट दीपक पांड्या तथा स्लोवेनियाई-अमरीकी उर्सुलिन बोनी पांड्या के परिवार में जन्म लेने वाली सुनीता विलियम्स ने यूएस नेवल एकेडमी से भौतिक विज्ञान की डिग्री ली है। इसके बाद उन्होंने फ्लोरिडा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग प्रबंधन में मास्टर ऑफ साइंस की डिग्री भी प्राप्त की है।

सुनीता विलियम्स को नासा द्वारा 1988 में अंतरिक्ष यात्री के तौर पर चुना था। सुनीता एक्स्पीडिशन 32 की फ्लाइट इंजीनियर और एक्स्पीडिशन 33 की कमांडर के तौर पर अपनी सेवाएं दे चुकी हैं।

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