अकेले दक्षिण भारत के राज्यों में है भारत के कुल स्वर्ण भंडार का लगभग 60 फीसद हिस्सा- एनएसएसओ

भारत में सोना रखने के मामले में सबसे टॉप पर केरल का नाम आता है। दरअसल यह सुनहरी धातु केरल की संस्कृति से जुड़ी है। यही कारण है कि वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल और बैंकिंग डेटा के अनुसार, केरल में प्रति व्यक्ति सोने की खपत राष्ट्रीय औसत से कहीं ज़्यादा है।

डीएनए की एक रिपोर्ट से पता चलता है कि केरल के मध्यमवर्गीय परिवारों में भी सोना किलो में पाया जाता है। वहीँ रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि केरल भारत की कुल वार्षिक स्वर्ण मांग का लगभग 20 प्रतिशत अकेले वहन करता है।

NSSO यानी नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस की घरेलू संपत्ति रिपोर्ट पर नज़र डालें तो पता चलता है कि भारत के कुल स्वर्ण भंडार का लगभग 60 फीसद हिस्सा अकेले दक्षिण भारत के राज्यों में केंद्रित है। ऐसे में केरल के अलावा अन्य दक्षिणी राज्यों का जायज़ा लें तो पता चलता है कि तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश भी इस रेस का हिस्सा हैं।

केरल के बाद अगला नंबर तमिलनाडु का आता है और इस राज्य में देश की कुल स्वर्ण मांग का लगभग 15 हिस्सा कवर होता है। उत्तर भारतीय राज्यों की तुलना से पता चलता है कि कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में भी सोने की खपत काफी अधिक है। रिपोर्ट बताती है कि इसका मुख्य कारण वहां की धार्मिक परंपराएं और सोने को सबसे सुरक्षित निवेश मानना है।

रिपोर्ट में साझा जानकारी के मुताबिक़, मॉर्गन स्टेनली और वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, भारतीय परिवारों के पास कुल मिलाकर करीब 34,600 टन सोना जमा है। इस आंकड़े की गंभीरता को इस बात से समझा जा सकता है कि दुनिया की महिलाओं के पास मौजूद कुल सोने का लगभग 11 फीसद हिस्सा अकेले भारतीय महिलाओं के पास है। यह मात्रा अमरीका, जर्मनी और स्विट्जरलैंड के कुल आधिकारिक गोल्ड रिजर्व के योग से भी अधिक है।

रिपोर्ट से एक और चौंकाने वाला आंकड़ा बताता है कि देश के कुल सोने का लगभग 60 फीसद हिस्सा ग्रामीण भारत के पास है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग बैंकों या शेयर बाजार के बजाय अपनी बचत को सोने के सिक्कों या गहनों में बदलना अधिक सुरक्षित समझते हैं।

इसके अलावा, दक्षिण भारत के बाद महाराष्ट्र और गुजरात सोने के बड़े खरीदार हैं। महाराष्ट्र, विशेष रूप से मुंबई, भारत का सबसे बड़ा स्वर्ण व्यापार केंद्र है। यहां निवेश के उद्देश्य से डिजिटल गोल्ड और गोल्ड ईटीएफ में निवेश करने वालों की संख्या सबसे अधिक है। वहीं गुजरात में सोने को एक तरल संपत्ति माना जाता है, जिसे व्यापारिक जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

हालाँकि रिपोर्ट इस लेख को केवल सामान्य जानकारी के रूप में प्रस्तुत करते हुए यह भी कहती है कि इस खबर में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए डीएनए हिंदी उत्तरदायी नहीं है।

लेकिन इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि केरल में मुथूट फाइनेंस और मणप्पुरम जैसी विशाल गोल्ड लोन कंपनियों का मुख्यालय होना इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि यहां के घरों में सोना भारी मात्रा में मौजूद है।

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