दोपहर में झपकी लेना या आराम करना मध्यम आयु वर्ग और वृद्ध लोगों के लिए एक राहत की बात हो सकती है, लेकिन जो लोग इस समय बहुत ज़्यादा सोते हैं, उनमें समय से पहले मौत का जोखिम बढ़ जाता है। यह नतीजे प्रस्तुत किए गए हैं एक अमरीकी शोध के ज़रिए।

शोधकर्ता इस संबंध में अमरीकन एकेडमी ऑफ़ स्लीप मेडिसिन की आगामी बैठक में अपनी रिपोर्ट पेश करने की तैयारी कर रहे हैं।
अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता और मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल बोस्टन में पोस्टडॉक्टरल रिसर्च फ़ेलो, चेनलू गाओ ने एक समाचार विज्ञप्ति में कहा कि जो लोग दिन में बहुत ज़्यादा सोते हैं और जिनकी दिन में सोने की आदतें अनियमित हैं या जो ज़्यादातर दिन के बीच में या सुबह जल्दी सोते हैं, उनमें इस तरह की मौत का जोखिम ज़्यादा होता है।
उन्होंने कहा कि भले ही वे अपने स्वास्थ्य और जीवनशैली को कवर कर लें, फिर भी यह जोखिम बना रहता है।
शोधकर्ताओं ने अध्ययन के लिए, यूके बायोबैंक लॉन्गिट्यूडिनल हेल्थ रिसर्च प्रोजेक्ट में 86,500 से ज़्यादा प्रतिभागियों के डेटा का विश्लेषण किया। उन्होंने कलाई पर पहने जाने वाले उपकरण का उपयोग करके एक सप्ताह तक अपनी नींद की आदतों पर नज़र रखी। साथ ही शोधकर्ताओं ने इन आदतों की तुलना मृत्यु दर के आंकड़ों के रिकॉर्ड से की।
जब नींद के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया तो इन लोगों की औसतन आयु 63 वर्ष थी। शोधकर्ताओं के अनुसार, 11 साल के फॉलो-अप के दौरान, लगभग 5,200 लोगों की मृत्यु हुई। जिससे यह स्पष्ट हो गया कि इस प्रकार की नींद से समय से पहले मौत का खतरा बढ़ जाता है।
