शोध कहता है मनुष्यों पर आनुवंशिकी से ज़्यादा पर्यावरण का प्रभाव पड़ता है

वैज्ञानिक हमेशा से ही प्रकृति बनाम पोषण के बारे में ज़्यादा से ज़्यादा साक्ष्य एकत्र कर रहे हैं ताकी पता कर सकें कि उम्र बढ़ने की प्रक्रिया के दौरान मानव कल्याण को इन दोनों में से कौन अधिक प्रभावित करता है।

शोध कहता है मनुष्यों पर आनुवंशिकी से ज़्यादा पर्यावरण का प्रभाव पड़ता है

नेचर मेडिसिन में प्रकाशित एक नए अध्ययन के अनुसार, हालांकि पर्यावरणीय जोखिम और आनुवंशिकी दोनों ही मानव उम्र बढ़ने को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन जीवन की स्थितियाँ और जीवनशैली विकल्प मानव स्वास्थ्य को आनुवंशिकी से कहीं अधिक प्रभावित करते हैं।


एक अध्ययन में पाया गया है कि जीन की तुलना में पर्यावरणीय कारक स्वास्थ्य को कहीं ज़्यादा प्रभावित करते हैं। प्रभाव का यह आंकड़ा असामयिक मृत्यु से भी जुड़ा पाया गया है।


ऑक्सफोर्ड पॉपुलेशन हेल्थ के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक नए अध्ययन से पता चलता है कि जीवनशैली और रहने की स्थिति सहित कई पर्यावरणीय कारक, हमारे जीन की तुलना में स्वास्थ्य और असामयिक मृत्यु पर अधिक प्रभाव डालते हैं।

शोध के अनुसार जीवनशैली से तात्पर्य धूम्रपान और शारीरिक गतिविधि पर आधारित रूटीन से है। यह अध्ययन नेचर मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है।

पहचाने गए 25 पर्यावरणीय कारकों में से, धूम्रपान, सामाजिक-आर्थिक स्थिति, शारीरिक गतिविधि और जीवन-यापन की स्थिति का मृत्यु दर और जैविक उम्र बढ़ने पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है।

इसके लिए शोधकर्ताओं ने 164 पर्यावरणीय कारकों और आनुवंशिक जोखिमों को जाँच के दायरे में रखा है। इसके प्रभावों की जांच करने के लिए लगभग पांच लाख यूके बायोबैंक प्रतिभागियों के डेटा का उपयोग किया गया।

अध्ययन के नतीजों से पता चलता है कि पर्यावरणीय कारकों का मृत्यु के जोखिम पर 17 प्रतिशत प्रभाव पाया गया, जबकि आनुवांशिक प्रभावों का 2 प्रतिशत से भी कम प्रभाव पाया गया।

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